
गाजियाबाद। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के कहने पर खुद को हरे रंग में रंगने वाले गाजियाबाद के विजय पाल की बात ही निराली है। हरियाली से इतना प्यार कि खुद को ही नहीं अपने आसपास की सभी चीजों को भी हरे रंग में ढाल लिया। फिर चाहे बदन पर मौजूद कपड़े हो या कंघी व पेन, सभी चीजें हरे रंग की। मानो हरा रंग ही बघेल की अब पहचान बन चुका है। यही कारण है कि पूरा गाजियाबाद उन्हें ग्रीन मैन के नाम से जानता है। इतना ही नहीं, पेड़-पौधों की सुरक्षा और उनसे असीम लगाव के चलते ही पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है। इतना ही नहीं, 2016 में यूपी की पूर्व की अखिलेश सरकार ने उनसे लखनऊ में गोमती नदी के आसपास के पर्यावरण को सुधारने के लिए सहयोग भी मांगा था।
10 लाख पेड़ बचा चुके हैं बघेल
विजय पाल बताते हैं कि वह अब तक करीब 10 लाख पेड़ों को कटने से बचा चुके हैं। इसके साथ ही वह देशभर में अनगिनत पौधे रोप चुके हैं। यूनेस्को के बुलावे पर वर्ष 2000 में विजय पाल अमेरिका में पर्यावरण संरक्षण पर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। जहां तब के अमेरिकी उपराष्ट्रपति अल गोर ने उन्हें क्लाइमेट लीडर्स संगठन में शामिल कर ग्रीन मैन ऑफ इंडिया की उपाधि से नवाजा था।
दादा की एक बात ने बना दिया ग्रीन मैन
वह बताते हैं कि जब वह छोटे थे तो कुछ लोग उनके गांव में गूलर का पेड़ काट रहे थे। इस पेड़ में पानी टपक रहा था। जब मैंने अपने दादाजी से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि चोट लगने से पेड़ रो रहा है। ऐसा सुनते ही मुझ पर इसका गहरा असर पड़ा। इसके बाद मैं रोते हुए उस पेड़ से लिपट गया और तब तक पेड़ नहीं छोड़ा जब तक उसे काटने वाले लोग बिना पेड़ काटे वहां से चले नहीं गए। इसके बाद से ये सिलसिला चल पड़ा जो आज तक जारी है।
सरकार की अहम योजना रुकवाने चले गए थे कोर्ट
बता दें कि वर्ष 2008 में बघेल सरकार की अहम योजनाओं में शुमार गंगा एक्सप्रेस, अपर गंगा एक्सप्रेस और फिर हिंडन एक्सप्रेसवे रुकवाने के लिए कोर्ट तक चले गए। कारण, इन प्रॉजेक्ट की जद में करीब 6 लाख पेड़ आ रहे थे। जिसके बाद सरकार को इन प्रॉजेक्ट को टालना पड़ा था।
देशभर में पेड़ बचाने को चलाए हैं कई अभियान
उन्होंने देशभर में पेड़ बचाने के लिए कई अभियान चलाए हैं। जिनमें मेरा वृक्ष योजना, आपरेशन ग्रीन, ग्लोबल ग्रीन मिशन, पेड़ लगाएं सेल्फी भेजें, मेरा पेड़-मेरी शान और मिशन सवा सौ करोड़ शामिल हैं। उनके मुताबिक देश के 724 जिलों में ग्लोबल ग्रीन पीस मिशन के तहत उनकी इकाई काम कर रही हैं।
पेड़ों के लिए यूआईडी नंबर के लिए कर रहे मांग
ग्रीन मैन को अब तक हरित ऋषि, हिमालय भूषण, जेपी अवार्ड, ग्रीन मैन जैसे अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं। वहीं अब उनकी मांग है कि पेड़ों को उन्हें जीवित प्राणी का दर्जा दिया जाए और सम्मान मिले। उन्होंने मांग की है कि राष्ट्रीय वृक्ष नीति के तहत पेड़ों के लिए यूआईडी नंबर हो, राष्ट्रीय वृक्ष बरगद को अन्य प्रतीकों की तरह ही सम्मान मिले।
बीज वाली गुल्लक की खिलाते हैं कसम
विजयपाल किसी के घर पर तभी कुछ खाते हैं जब लोग बीज गुल्लक बनाने की कसम खाते हैं। वह बताते हैं कि इसके लिए किसी भी बेकार डिब्बे में फलों के बचे हिस्से व बीज इक_े करने होते हैं। जिन्हें बाद में चिडिय़ों को खिला दिया जाता है। इसके बाद जब चिडिय़ा के बीट करती है तो अधिकांश बीजों से पौधे उग आते हैं। इस गुल्लक में भविष्य के लिए ऑक्सिजन संजोने की बात वह कहते हैं
Published on:
06 Sept 2019 09:17 pm
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