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अंग्रेजों ने करोड़ों की लागत से बनाया था ये हिंडन का पुल, जानिए इस पुल की खासियत

अंग्रेजों ने अपने तकनीकी एक्सपटर्स की मदद से किया था निर्माण

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Rajkumar Pal

Jun 30, 2017

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वैभव शर्मा,
गाजियाबाद। आजादी के समय में हिंडन नदीं के घाट पर बनाए गए पुल में गुरूवार को दरार आ गई। गनीमत रही कि तय वक्त में इसका पता चल गया और तुरंत इस पर चल रहे ट्रैफिक को रूकवा कर पुल को बंद कर दिया गया। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। गाजियाबाद में 60 साल पहले बना ये पुल अपने आप में लंबा चौड़ा इतिहास समेटे हुए हैं। दरअसल अंग्रेजों ने अपने फायदे को इस पुल का
निर्माण कराया था।

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कोलकाता जाने का सीधा रास्ता

कारोबार को बढ़ाने की नीयत से उस समय इस पुल को कड़ी मशक्कत के बाद में तैयार कराया। ये पुल कोलकाता तक जाने का सीधा रास्ता था। राजधानी दिल्ली से गाजियाबाद होते हुए बुलंदशहर कानपुर के रास्ते लोग कोलकाता तक पहुंचते थे। इसी पुल की बदौलत बड़े वाहन माल लादकर यहां से गुजरते थे। बताया जाता है कि अंग्रेजों ने अपने एक्सपर्ट्स की मदद से उस वक्त भी करीब चार करोड़
रुपये की अनुमानित लागत से इसका निर्माण कराया था।

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मियाद पूरी कर चुका था पुल

60 साल से अधिक सफर तय करने की वजह से हिंडन का पुल अपनी मियाद पूरी कर चुका था। मरम्मत के अभाव में अब पुल के दूसरे स्पैम के बीम और स्लैब में दरार आ गई। इसके साथ ही जहां पर पिलर ज्वाइंट होते हैं, वो बियरिंग भी जाम हो गए हैं। मौजूदा स्थिति को देखते हुए सेतु निगम के प्रोजेक्ट डॉयरेक्टरों ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका सीधा संकेत दोबारा से नए पुल के निर्माण कराए जाने पर है। 1956-57 में पीडब्लूएडी ने इसके ऊपरी हिस्से का निर्माण कराया था।

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पुल से जुड़े हुए तथ्य

1857 में हरनंदी (हिंडन) नदी पर आजादी की पहली क्रांति हुई थी। तब पक्के पुल के साथ में एक पैटून पुल का निर्माण भी कराया गया था। आजादी के कई साल बाद तक इस पुल का इस्तेमाल हुआ। 1978 में आई बाढ़ के बाद में पैटून का पुल बह गया था। साल 2006 में पुल के ज्वाइंट की मरम्मत पीडब्लूडी ने की थी। 2009 में इस पुल को जीडीए ने कंडम घोषित कर दिया था।

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30 साल होती है पुल की मियाद

सेतु निगम के प्रोजेक्ट मैनेजेर अजय कुमार के मुताबिक किसी भी पुल की उम्र तीस साल निर्धारित होती है। वाहनों का दबाव और घनत्व बढ़ने पर दोबारा से उस पर मरम्मत का काम कराया जाता है। जब ये पुल बना था उस समय करीब दस मिनट में एक वाहन यहां से गुजरता था। लेकिन मौजूदा समय में एक वाहन प्रति सैकेंड के हिसाब से गुजरता है।