
तालाबों पर अवैध कब्जे की शिकायतों पर उचित सुनवाई नहीं
वैभव शर्मा, गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार में आम आदमी की सुनवाई के लिए तमाम शहरों में तहसील दिवस लगाकर हर विभाग की शिकायतों को अधिकारियों द्वारा सुना जाता है। शिकायत विभाग के पास में आने के बाद इसे आईजीआरएस पोर्टल पर डाला जाता है ताकि शिकायत करने वाला और अधिकारी इस पर संज्ञान लेकर फीडबैक लेकर शिकायतों का निबटारा किया जा सके। लेकिन सरकार के इस अच्छे प्रोजेक्ट को अधिकारी हल्के में लेकर हवा में ही बिना किसी निरीक्षण के शिकायतों को निस्तारित बता रहे है।
केस - 1
तालाब को लेकर डाली गई थी शिकायत
आईजीआरएस पोर्टल के जरिए शिकाय़तों की सुनवाई को जानने के लिए पत्रिका संवाददाता की तऱफ से तालाबों पर हुए अवैध कब्जे को लेकर शिकायत की गई। इसमें वार्ड 23 गांव डून्डाहेडा में तालाब की जमीन को मुक्त किए जाने की मांग की गई। 4 जुलाई को शिकायत की गई। इसके लिए 30073917000431 नम्बर निर्धारित किया गया।
केस- 2
पार्क के नाम पर लगाई झूठी रिपोर्ट
अशोक नगर इलाके के लोगों ने ए ब्लाक के पार्क में देखभाल न होने की वजह से पार्क को जंगल बताते हुए उसमें जहरीले सांप होने की बात कही थी। आईजीआरएस पर 2 अगस्त को शिकायत (400140170006843) की गई। 4 अगस्त को इस पर बिना सुनवाई किए इसे निस्तारित बता दिया गया। जबकि वहां कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा। 9 अगस्त को वहां के लोगों ने पार्क से निकली गोह (सांप की एक प्रजाति) को घेर कर मार डाला.
नगर आयुक्त से मांगी गई आख्या
डून्डाहेडा गांव में तालाबों की जमीन पर कब्जे को लेकर डीएम मिनीस्ती एस की तरफ से आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से शिकायत को देखा गया। इसके बाद में नगर आयुक्त को शिकायत ट्रांसफर करके इसकी आंख्या मांगी गई। नगर आयुक्त ने विजयनगर जोन की प्रभारी सरिता सिंह की आंख्या को 19 जुलाई को डीएम को प्रेषित कर दिया। नगर आयुक्त ने अपनी आंख्या में बताया कि एनजीटी औऱ प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में ग्राम समाज नगर निगम की जमीन, तालाब, पोखर पर अतिक्रमण चिन्हित करके सूचिबद्ध तरीके से कारवाई की जा रही है। शिकायत पत्र में दी गई वर्णित भूमि पर हुए कब्जे को स्थलीय निरीक्षण के बाद हटवा दिया जाएगा।
जिलाधिकारी को भेजी झूठी आख्या
आईजीआरएस पर 19 जुलाई को नगर आयुक्त की तरफ से डीएम को भेजी आख्या में बताया गया कि तालाब की जमीन को चिन्हित करके उसपर से अवैध कब्जे को हटवा दिया जाएगा। इसके एक हफ्ते बाद बिना कोई कारवाई करे ऑन लाइन पोर्टल पर शिकायत को निस्तारित दिखा दिया गया। जबकि कारवाई किए जाने की बात कहकर डीएम को गुमराह किया गया।
सीएमओ से नगरआयुक्त की रोकी जा चुकी है सैलरी
सीएम के आदेश पर जिलाधिकारी ने सख्ती दिखाते हुए सभी विभाग के अधिकारियों को आईजीआरएस पर आने वाली शिकायतों के प्रमुखता से निबटारा किए जाने के दिशा निर्देश जारी किए हुए है। लापरवाही करने पर नगरायुक्त, उपश्रमायुक्त, मुख्य चिकित्साधिकारी,बेसिक शिक्षा अधिकारी, सिटी मजिस्ट्रेट आदि अधिकारियों के वेतन भी काटे जा चुके है। फिर भी अधिकारी सुनने के लिए तैयार नहीं है।
Published on:
10 Aug 2017 06:36 pm
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