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यूपी के इस शहर की 654 करोड़ रुपये से बदलेगी तस्वीर

एक बार फिर औद्योगिक नगरी के रूप में जाना जाएगा जिला  

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गाजियाबाद। महानगर गाजियाबाद को बार फिर से औद्योगिक नगरी के रूप में अपनी पुरानी पहचान वापस हासिल होगी। 654 करोड़ रूपये के निवेश से महानगर की तस्वीर को बदलने का काम किया जाएगा। इतने बड़े निवेश से युवाओं को भी रोजगार के नए अवसर मिल सकेगें।

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महज एक साल के भीतर गाजियाबाद में 654 करोड़ रूपए का निवेश सभी 10 औद्योगिक क्षेत्रों में होगा। यूपीएसआईडीसी, जिला प्रशासन सहित नगर निगम और जीडीए सभी के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है। आने वाले एक साल में शहर में 654 करोड़ रूपए विभिन्न कंपनियों द्वारा निवेश किया जाएगा। इसमें से 162 करोड़ रूपए के 43 एमओयू साइन हो चुके हैं। निवेश करने वाली कंपनियों में ऑटो पार्टस, रबर उद्योग, इलेक्ट्रानिक सामान बनाने वाली कम्पनियां शामिल होंगी। यूपीएसआईडीसी विभाग के अधिकारियों केस मुताबिक गाजियाबाद खास तौर पर मैन्यूफैक्चरिंग हब के तौर पर विकसित किया जाएगा। पहले भी गाजियाबाद इंजीनियरिंग गुड्स के लिए जाना जाता था , फिर से उसे वहीं पहचान दिलाने की कोशिश की जाएगी।

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यूपीएसआईडीसी की क्षेत्रीय प्रबंधक स्मिता सिंह ने बताया कि उद्योगों को शहर की तरफ आकर्षित करने के लिए जमीन की किल्लत को दूर कर लिया गया है। हर प्रकार के उद्योग के लिए 544 भूखंडो की व्यवस्था की गई हैा जिसमें से 433 प्लॉट जिनपर पहले कभी कोई उद्योग था उनको ट्रांसफर किया जाएगा। इसके अलावा111 प्लॉटों पर फिर से उद्योग स्थापित करने के लिए टाइम एक्सटेंशन दिया गया है। उन भूखंडों में से 224 के नक्शे भी स्वीकृत किए जा चुके हैं। वहीं खाली पड़े औद्योगिक भू-खंडों को भी निरस्त करने की प्रक्रिया चल रही है। इस जद में 400 से 500 प्लॉट आएंगे। इन भू-खंडो पर भी औद्योगिक इकाई को स्थापित किया जाएगा।

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स्मिता सिंह ने बताया कि यूपीएसआईडीसी का प्रयास है कि बड़ी इकाईयों के अलावा शहर में लघु व कुटीर उद्योगों को पनपने का भी मौका दिया जाएगा। ऐसे उद्योग जो बड़े प्लॉटों पर ना होकर केवल एक हॉल में ही चलाए जा सकते हैं उनके लिए फ्लोर वाइस फैक्ट्री के उपाय पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए एफएआर बढाया जाएगा। साथ ही निगम और जीडीए से भी सहयोग लिया जाएगा ताकि इनकी जमीन पर भी बिना प्रदुषण वाली इकाईयां स्थापित की जा सके।