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हरीश राणा की खामोश होती सांसें, बेटे को जाते देख टूट रहा पिता का दिल, थम नहीं रहे आंसू

Harish Rana Passive Euthanasia Case: एम्‍स में हरीश राणा के लाइफ सपोर्ट सिस्‍टम हटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पोषण और पानी देने वाली नली हटा दी गई है। उनको ऑक्‍सीजन भी नहीं दिया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरीश राणा को फिलहाल ब्रेन से जुड़ीं दवाइयां दी जा रही हैं।
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Which organ will be donated after Harish Rana's death?

Harish Rana Passive Euthanasia Case: गाजियाबाद की राज एम्पायर सोसायटी में एक फ्लैट के बाहर अब पहले जैसा शोर नहीं है। कुछ दिन पहले तक यहां लोगों की भीड़ लगी रहती थी। कोई हालचाल पूछने आता, कोई दुआ करता। लेकिन अब यहां सन्नाटा है। दरवाजे के पास रुकते ही पड़ोसियों के चेहरे पर भारीपन साफ दिखता है, क्योंकि इसी घर का बेटा हरीश राणा अब दिल्ली के एम्स में जिंदगी से विदा लेने की तैयारी में है।

जवान बेटे की अंतिम विदाई की घड़ियां जैसे-जैसे करीब आ रही हैं, पिता अशोक राणा के आंसू थम नहीं हैं। रुंधे हुए गले और बेहद धीमी आवाज में वे बस इतना ही कह पाए, 'मेरे भीतर जो दर्द का समंदर उमड़ रहा है, उसे बयां करने की शक्ति मुझमें नहीं है। एक पिता के पास अपने बेटे को खोने की पीड़ा के लिए शब्द कम पड़ गए हैं।

13 साल पहले बदली थी जिंदगी

करीब 13 साल पहले हरीश राणा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि वह गांव का पहला इंजीनियर बनेगा। लेकिन यूनिवर्सिटी की चौथी मंजिल से गिरने के बाद सब कुछ बदल गया। गंभीर चोट के बाद हरीश कोमा में चला गया। शरीर ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया। डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि उसके ठीक होने की संभावना लगभग खत्म है।

इलाज चलता रहा

परिवार ने उम्मीद नहीं छोड़ी। करीब 13 वर्षों तक इलाज चलता रहा। हरीश को घर पर ही बिस्तर पर रखा गया। पिता और परिवार के लोग लगातार देखभाल करते रहे। लेकिन समय के साथ हालत जस की तस रही। आखिरकार जब डॉक्टरों ने भी कोई उम्मीद नहीं जताई, तो परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई।

सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद प्रक्रिया शुरू

सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद दिल्ली एम्स में हरीश राणा के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पोषण और पानी देने वाली नली हटा दी गई है। ऑक्सीजन सपोर्ट बंद कर दिया गया है। डॉक्टर फिलहाल उन्हें ब्रेन से जुड़ी दवाइयां दे रहे हैं।

पिता की आंखों में अधूरा सपना

गाजियाबाद वाले घर में बैठे पिता अशोक राणा बार-बार बेटे के बचपन और अपने सपनों को याद करते हैं। वह बताते हैं कि हिमाचल के उनके गांव में कोई इंजीनियर नहीं था, इसलिए उन्होंने सोचा था कि अपने बड़े बेटे हरीश को इंजीनियर बनाएंगे जो गांव का नाम रोशन करेगा, लेकिन होनी ने 13 साल पहले ऐसा खेल खेला कि वह बिस्तर पर आ गया और फिर उठ ही नहीं पाया। अब तो उसके जाने का समय आ गया है। यह कहते-कहते फफक पड़ते हैं।

राज एम्पायर सोसायटी के पड़ोसी कहते हैं कि इस परिवार ने 13 साल तक उम्मीद नहीं छोड़ी। आज जब हरीश जिंदगी की आखिरी दहलीज पर है, तो पूरा इलाका इस दर्द को महसूस कर रहा है।

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