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किसान ट्रैक्टर रैली : ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे हुआ बंद, गाजियाबाद से पलवल जा रहे किसान

तीन दिन पहले किसानों ने किया था रैली का ऐलान रैली के दाैरान पुलिस ने पेरिफेरल पांच घंटे रखा बंद बुधवार को जारी हुई थी रूट डायवर्जन एडवाइजरी

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किसान रैली

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

गाजियाबाद. किसान ( kisan ) ट्रैक्टर रैली ( Tractor Rally ) ने गुरुवार को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे ( Eastern Peripheral Expressway ) बंद कर दिया। सुबह के समय किसानों के बड़े काफिले ने यूपी गेट से कूच किया और नेशनल हाईवे-9 पर डासना होते हुए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर पहुंच गए। इस दौरान सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ हजारों किसानाें के काफिले ने दिल्ली का चक्कर लगाया ताे रास्ता बंद हाे गया। इस तरह गुरुवार काे दिल्ली के चारों किसान ही किसान दिखाई दिए।

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किसानों ने बताया कि मजबूरी के तहत वह रिहर्सल कर रहे हैं। बार-बार आग्रह के बाद भी सरकार अपनी बात पर अडिग है और हमारी मांगे नहीं मानी जा रही हैं। किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि 26 जनवरी की परेड में लाखों किसान हिस्सा लेंगे और दिल्ली में ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर नजर आएंगे। इसी के रिहर्सल के लिए गुरुवार को पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर एक ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया गया है।

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उन्होंने यह भी कहा कि, एक्सप्रेस वे पेरिफेरल पर कुल चार पॉइंट बनाए गए हैं। हर पॉइंट पर दोनों तरफ से किसान आकर आपस में मिलते हैं और वहीं से वह वापस हाेंगे। इस तरह से किसानाें ने दिल्ली का चक्कर लगाते हुए गुरुवार काे रिर्हसल किया ताे चारों ओर किसान ही किसान दिखाई दिए।

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किसानों की इस ट्रैक्टर रैली से एक्सप्रेस-वे पेरीफेरल पूरी तरह से किसानाें के कब्जे में रहा। किसानाें की वजह से हाइवे पर जाने वाले काे काफी परेशानी उठानी पड़ी। किसानाें की इस रैली के कारण करीब छह घंटे तक एक्सप्रेस-वे की रफ्तार पर ब्रेक लगी रही। इस दाैरान हाइवे से चलने वाले लोगों ने कहा कि किसानाें की इस ट्रैक्टर रैली से उन्हे खासी परेशानी उठानी पड़ी है।

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दरअसल, नए कृषि कानून को रद्द किए जाने की मांग को लेकर पिछले 42 दिन से बड़ी संख्या में किसान गाजियाबाद के यूपी गेट बॉर्डर पर बैठे हुए हैं। सरकार और किसानों के बीच सात बार वार्ता हाे चुकी है लेकिन हर बार किसान और सरकार के बीच हुई वार्ता बेनतीजा ही रही। आठ जनवरी को फिर से सरकार ने किसानों के साथ वार्ता किए जाने का समय दिया है लेकिन किसान अपनी बात पर अडिग हैं। फिलहाल किसानों का मानना है कि जिस तरह से सरकार के साथ सात बार बात हुई चुकी हैं और कोई नतीजा नहीं निकला है उन्हें लगता है कि आठ जनवरी को भी आपस में तालमेल नहीं बन पाएगा और किसान मजबूरी वश आंदोलन पर बैठेंगे।

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गुरुवार को किसानों नेे रैली के दौरान साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि 8 जनवरी को वार्ता विफल होती है तो किसान अपनी भैंस धरना स्थल पर लाकर बांधने को मजबूर होंगे। किसान नेता चाैधरी राकेश टिकैत ने 26 जनवरी की परेड़ में ट्रैक्टरों की झांकी निकाले जाने की बात भी कही है और उसी के रिहर्सल के लिए किसानाें ने गुरुवार काे पेरीफेरल पर ट्रैक्टर रैली निकाली।

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