
कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम में कृष्ण लीला का मंचन करतीं कलाकार।
Krishna Janmashtami: कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाया गया। इस दौरान नृत्य, गीत-संगीत, आनंद से भी कृष्ण भक्त भाव विभोर हो गए। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु एवं गुरु परिवार द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके बाद गुरु ने आशीर्वचन देते हुए भगवान कृष्ण की पीड़ा की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि कैसे उस कुछ घण्टे पूर्व जन्मे बच्चे ने उस तूफानी रात और बांस की टोकरी को सहा होगा। नंद बाबा और माँ यशोदा ने अपनी नन्ही सी सन्तान का बलिदान किया। कैसे भगवान ने कष्ट सहे और जीवनभर दूसरों के लिए जिया। दैनिक पूजा पद्धति के बारे में बात करते हुए कहा कि उसमें दिखावा नहीं, प्रभु के लिए भाव और समर्पण होना चाहिए। तभी हम प्रभु के सच्चे भक्त बनेंगे।
श्री कृष्ण के जीवन पर एक नाटिका प्रस्तुत की गयी। जिसने श्री कृष्ण से जुड़े अनेक मिथकों को तोड़ा और उनका सही चरित्र उजागर किया। बच्चियों ने लोक नृत्य प्रस्तुत किया। सुर - साधक मंडली ने अपने भजनों की धुन से सभी को भाव विभोर कर खूब नृत्य कराया।
कृष्ण का जन्म होते ही आनंद के साथ नृत्य कर वातावरण और अधिक आनंदित हो गया। श्री कृष्ण पूजन के बाद सभी ने भजन गाकर वातावरण को धार्मिक माहौल में परिवर्तित कर दिया। इस प्रकार क्षमा प्रार्थना के साथ यह जन्मोत्सव पूर्ण हुआ।
वहीं मेरठ के औघडनाथ मंदिर में भी कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान मंदिर में सुबह से ही कृष्ण भक्तों की भारी भीड़ जुटी रही। गली मोहल्लों में कृष्ण जन्माष्टमी के मौके झांकिया सजाई गई थी।
Published on:
08 Sept 2023 08:46 am
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