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गजब: इस गांव में नहीं मनाया जाता रक्षाबंधन का त्यौहार, मोहम्मद गोरी से जुड़ा है किस्सा

Highlights: -सैकडों वर्षों से नहीं मनाया गया त्यौहार -गांव के लोग मानते हैं अशुभ -गांव से बाहर जा चुके लोग भी नहीं मनाते रक्षाबंधन
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गाजियाबाद। 3 अगस्त यानी सोमवार को देशभर में रक्षाबंधन का त्यौहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाना है। लेकिन दिल्ली से सटे गाजियाबाद में एक गांव ऐसा भी है जहां पर रक्षाबंधन के दिन भाइयों की कलाई सुनी रहती है। कारण, इस गांव में रक्षाबंधन का त्यौहार नहीं मनाया जाता। इतना ही नहीं, यहां के लोग इस दिन को काला दिन मानते हैं।

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दरअसल, गाजियाबाद के मोदीनगर इलाके में हजारों वर्ष पुराना एक गांव है सुराना। जहां पर सैकड़ों साल से रक्षाबंधन का त्यौहार नहीं मनाया जाता है। इस गांव के लोगों का कहना है कि रक्षाबंधन ना मनाए जाने का कारण यह है कि 12 वीं सदी में मोहम्मद गौरी ने इस गांव पर कई बार आक्रमण किया। लेकिन जब वह इस गांव में आक्रमण करने आता था तो हर बार उसकी सेना अंधी हो जाती और उसे पस्त होकर वापस लौटना पड़ता था।

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इस गांव के रहने वाले कपिल, मनोज और एक महिला राजवंती ने बताया कि कहा जाता है कि इस गांव में एक देव रहते थे और वही पूरे गांव को सुरक्षित रखा करते थे। रक्षाबंधन के त्यौहार के दिन हिंदू धर्म में गंगा स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। इसलिए रक्षाबंधन के दिन देव गंगा स्नान करने चले गए थे। इसकी सूचना गांव के ही एक मुखबिर द्वारा मोहम्मद गौरी को दी गई। जिसके बाद गौरी ने इस गांव पर हमला बोल दिया और जितने भी लोग गांव के अंदर मौजूद थे सभी को हाथियों से कुचलवा दिया था।

बताया जाता है कि जब देव गांव में वापस लौटे तो उन्होंने सब तहस-नहस पाया। गांव में महज एक महिला ही बची थी। वह गर्भवती थी। वह भी इसलिए बच गई कि वह अपने मायके अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने गई हुई थी। तभी से इस पूरे गांव में रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता है। बताया जाता है कि यहां की बहु अपने मायके अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती है। जबकि यहां की लड़कियां अपने भाई की कलाई पर राखी नहीं बांधती ।बुजुर्ग लोगों का कहना है कि इस गांव के लोग यदि बाहर जाकर भी बस गए हैं तो वह भी रक्षाबंधन के त्यौहार को नहीं मनाते।