6 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एनसीआर में धुएं से जहरीली बन रही लोगों की जिंदगी, पनप रही है ये बीमारी

गर्मी में धूल के कण बढा सकते है अस्थमा के मरीजों की मुसीबत

2 min read
Google source verification

गाजियाबाद। राजधानी से सटे एनसीआर रीजन के शहरों मे लोगों की जिंदगी भागदौड़़ वाली हो गए है। आज हर किसी के पास में ट्रासपोर्ट के लिए अपने साधन है तो डवल्पमेंट के नाम पर हवा में जमकर धुल उड़ कही है। लेकिन हवा में घुले हुए धूल के कण आम लोगों के लिए अस्थमा की बिमारी को बढावा दे रहे है। गाजियाबाद के मल्टीस्पेशिलिटी यशोदा अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक एनसीआर में अस्थमा के पेशेंट्स की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। रोजाना पांच नए पेशेंट्स इस बिमारी की वजह से अस्पताल तक पहुंच रहे है। अगर सहीं वक्त पर इसका पता लगा लिया जाए तो लोग असुविधा से बच सकते है।

यूपी हेल्थ स्ट्रैंथनिंग प्रोजेक्ट के सर्वे में शामिल हुआ एनसीआर का ये गवर्नमेंट हॉस्पिटल

इन वजहों से होती है अस्‍थमा की बिमारी
यशोदा अस्पताल के डॉक्टरों डॉ बृजेश प्रजापत के मुताबिक आज के समय में अस्‍थमा का सबसे बड़ा कारण है प्रदूषण। कल कारखानों, वाहनों से निकलने वाले धूएं अस्‍थमा का कारण बन रहे हैं। सर्दी, फ्लू, धूम्रपान, मौसम में बदलाव के कारण भी लोग इस बिमारी से ग्रसित हो रहे हैं। कुछ ऐसे एलर्जी वाले फूड्स हैं जिनकी वजह से सांस संबंधी बीमारियां होती हैं। पेट में अम्‍ल की मात्रा अधिक होने से भी अस्‍थमा हो सकता है।

प्राईवेट स्कूलों की मनमानी पर शिवसेना ने भाजपा को लिया आड़े हाथ

योगा औऱ तनाव भी बढा सकते है मुश्किल
अस्थमा की बिमारी केवल पॉल्यूशन से ही रूटीन जिंदगी में गलत तरीके से किए जाए वाले योगा से भी हो सकते है। डॉक्टर ने इसकी भी पुष्टि की है, वहीं दवाईयां, शराब का सेवन और कई बार भावनात्‍मक तनाव भी अस्‍थमा का कारण बनते हैं। इसके अलावा तीन में से एक शख्स में यह समस्‍या आनुवांशिक होती है।

यूपी की सबसे बड़ी विधानसभा के विधायक ने मदरसे को सील करने के लिए सीएम योगी को लिखा लेटर

इलाज के साथ बचाव है जरूरी
डॉक्टर का मानना है कि अस्‍थमा में इलाज के साथ बचाव की ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे मरीजों को बारिश और सर्दी से ज्‍यादा धूल भरी आंधी से बचना चाहिए। बारिश में नमी के बढ़ने से संक्रमण की संभावना ज्‍यादा होती है। ज्‍यादा गर्म और ज्‍यादा नम वातावरण से बचना चाहिए, क्‍योकि इस तरह के वातावरण में मोल्‍ड स्‍पोर्स के फैलने की संभावना बढ़ जाती है।घर से बाहर निकलने पर मास्‍क साथ रखें और कोशिश करे कि जहां आप रहते है वो डस्‍ट फ्री हो। योग के माध्‍यम से अस्‍थमा पर कंट्रोल किया जा सकता है। बस आपकों को सुबह के समय सूर्य नमस्‍कार, प्राणायाम, भुजंगासन जैसे योग अस्‍थमा में फायदेमंद होते हैं।अगर आप अस्‍थमा के मरीज हैं तो दवाईयां साथ रखें, खासकर इन्‍हेलर या अन्‍य वह चीजें जो आपको डॉक्‍टर द्वारा बताई गई हैं।

लोकसभा चुनाव में अस्तित्व बचाने के लिए रालोद ने अपनाया ये फार्मूला

अस्थमा अटैक से बचने के टिप्स

डॉ. संगीता गर्ग ने बताया कि ज्या‍दा गर्म और नम वातावरण में मोल्ड स्पोर्स के फैलने की सम्भावना अधिक होती है इसलिए ऐसे वातावरण से बचें। आंधी और तूफान के समय घर से बाहर ना निकलें । अगर आपका बच्चा अस्थमैटिक है, तो उसके दोस्तों व अध्यापक को बता दें कि अटैक की स्थिति में क्या करना है । हो सके तो अपने पास स्कार्फ रखें जिससे आप हवा के साथ आने वाले पॉलेन से बच सकें । इंफ्लूएंजा और न्यूमोनिया के टीके लगवाने से अस्थमा के दौरे से बचा जा सकता है। उन ट्रिगर्स को पहचानें जो अस्थमा को तेज करते हैं।

इन सेंटरों में होता था ऐसा काम कि पहुंची पुलिस तो मच गया हड़कंप, देखें वीडियो