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13 लोगों के जिंदा जलने पर परिवार वालों को मुआवजा मिला या नहीं, मानव अधिकार आयोग ने मांगे सबूत

11 नवंबर 2016 को शहीदनगर में एक तीन मंजिला इमारत में जैकेट की फैक्ट्री में आग लगने से 13 लोगों की जलने से मौत हुई थी।

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गाजियाबाद। महानगर गाजियाबाद में सन् 2016 में शहीदनगर जैकेट फैक्ट्री में 13 लोगों के जिंदा जलने के मामले में परिवारों को अभी तक मुआवजा दिया गया है या नहीं, अब इस पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में मानव अधिकार आयोग ने जिला प्रशासन की तरफ से दिए गए जबाव को संदिग्ध मानते हुए अब चार हफ्तों के भीतर पेमेंट प्रूफ मांगे है। इसके अलावा एसएसपी से भी ह्यूमन राइड डिफेंडर की सुरक्षा को हटाए जाने पर जबाव मांगा गया है। आयोग की तरफ से जिलाधिकारी और एसएसपी दोनों से तय समय के भीतर जबाव दिए जाने के लिए कहा गया है।

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क्या है पूरा मामला

बता दें कि 11 नवंबर 2016 को साहिबाबाद के शहीदनगर में एक तीन मंजिला इमारत में जैकेट की फैक्ट्री चल रही थी। सुबह करीब साढ़े चार बजे मकान में अचानक आग लग गई। संकरी गली होने की वजह से दमकल की गाड़ियां मौके पर नहीं पहुंच सकी और स्थानीय लोगों ने ही नाले के पानी से आग को बुझाया। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई थी। फैक्ट्री एक रिजवान नाम के शख्स की थी। इस मामले में आरटीआई एक्टिविस्ट और ह्यूमन राइट डिफेंडर राजीव शर्मा की तरफ से मानव अधिकार आयोग में पूरे मामले में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा दिए जाने की मांग और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी।

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ह्यूमन राइट डिफेंडर का कहना...

आरटीआई एक्टिविस्ट राजीव शर्मा ने बताया कि जैकेट फैक्ट्री हादसे में मारे गए लोग सभी बाहर के रहने वाले थे। ऐसे में डीएम गाजियाबाद की तऱफ से आयोग को बताया गया कि परिवार के लोगों को दो - दो लाख रुपये मुआवजा दे दिया गया है, इसलिए संदिग्ध लगने पर इसके संबंध में आयोग में अर्जी लगाई गई। इस पर मानव अधिकार आयोग ने जिलाधिकारी से चार हफ्ते के भीतर इसके प्रमाण देने के लिए कहा गया है। इसके अलावा कई अन्य मामलों की पैरवी करने की वजह से पुलिस सुरक्षा मिली हुई थी। जिसे कुछ समय पहले बिना बताए हटा लिया गया। इसके संबंध में भी एसएसपी से एक हफ्ते के भीतर जबाव दाखिल करने के लिए कहा गया है।