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Teen Talaq: फैसले से खफा हैं मुस्लिम पुरूष, कहा- औरतें गलत करेंगी तो तलाक मिलेगा ही

मुस्लिम पुरूषों का कहना- शरीयत अल्लाह ताला के हिसाब से तीन तलाक पहलेहै। जबकि कानून बाद में बनाया गया है।

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गाजियाबाद. आखिर काफी मंथन के बाद सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों द्वारा तीन तलाक पर जो अपना फैसला सुनाया गया उससे मुस्लिम समाज की महिलाएं तो बेहद खुश हैं लेकिन यदि पुरुषों की बात की जाए तो पुरुषों के द्वारा इस बात को लेकर मिली जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। हमने इस बारे में कुछ मुस्लिम समाज के पुरुषों से भी उनकी प्रतिक्रिया ली। उन्होंने बताया कि समाज के लिए सबसे पहले शरीयत है। शरीयत अल्लाह ताला के हिसाब से है। जबकि कानून बाद में बनाया गया है।

गाजियाबाद के मुस्लिम समाज के मोबीन अहमद ने बताया कि कानून तो बनते बिगड़ते रहते हैं लेकिन जो अल्लाह ताला के हिसाब से शरीयत है हमें उसके हिसाब से ही चलना चाहिए और हम उसी के हिसाब से चलेंगे इसके अलावा हमने एक दो प्रतिक्रियाएं और ली तो उन्होंने भी यही जवाब दिया कि उनके लिए पहले शरीयत उसके बाद कोई कानून। उन्होंने कहा कि जब शरीयत के हिसाब से तीन तलाक रखा गया है तो उसे बरकरार रहना चाहिए। यदि हम अल्लाह ताला के बनाए गए नियमों से छेड़छाड़ करते हैं तो यह हमारे लिए गुनाह होगा। बहराल इस युग में भी अभी पुरानी विचारधारा वाले ऐसे लोग भी हैं जोकि कानून से ऊपर शरीयत को तरजीह देते हैं।

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ऐसे लोगों का मानना है कि अभी तक किसी को कोई आपत्ति नहीं थी लेकिन जब से भाजपा की सरकार आई है तब से इस तीन तलाक वाले मामले में जमकर राजनीति चल रही है। और यह सब राजनीति के चलते ही हुआ है भले ही नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए कैसे भी नियम कानून क्यों ना बनाए लेकिन हम अल्लाह ताला द्वारा बनाए गए शरीयत के हिसाब से ही चलेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा की सरकार आने के बाद मुस्लिम महिलाओं को भड़काने का काम किया गया है। जिसके बाद भाजपा अपनी राजनीति चमकाने में लगी है। बहराल तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी कुछ मुस्लिम समाज के पुरुष मानने को तैयार नहीं है। उनका साफतौर पर कहना है कि जो भी अल्लाह ताला की हुकुम के अनुसार होगा हम उसे ही मानेंगे। इसके अलावा हम कोई कानून का पालन नहीं करेंगे।

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हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि अभी कोर्ट का फैसला साफ तौर पर सामने नहीं आया है। क्योंकि पांच जजों की बेंच में दो जजों का विरोधाभास रहा है जबकि तीन जजों ने तीन तलाक को बंद करने की बात कही है। लेकिन हमारी शरीयत यह कदापि नहीं कहती कि अल्लाह ताला के हुक्म से ऊपर हम बदलते हुए कानून के अनुसार चलें।

हालांकि हाजी मोबीन अहमद से हमने यह भी पूछा यदि तीन तलाक का मामला उनकी लड़की के सामने आए तो क्या आप तब भी तीन तलाक के मामले की वकालत करेंगे उसके जवाब में मोबीन अहमद ने बताया कि कोई भी शख्स बिना गलती के तलाक नहीं देता इसलिए चाहे बहू हो या लड़की यदि गलत है तो वह भी अल्लाह ताला के हुकुम के अनुसार इसी दायरे में आएंगी

एक मस्जिद के काजी इमाम ने भी भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब से भाजपा देश में आई है तब से भाजपा नेताओं द्वारा हिंदू मुस्लिम को बांटने का काम किया जा रहा है और अब तीन तलाक के नाम पर जमकर अपनी वाहवाही लूटने में लगे है।