
गाजीपुर जिला अस्पताल
गाजीपुर. जनपद इन दिनों स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर काफी चर्चा में रहा है। एक ओर जहाँ जिला अस्पताल में डाक्टर की कमी दवा की कमी के साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई बैठक किया गया। यही नहीं जिला योजना की बैठक में भी प्रभारी मंत्री के सामने बुनियादी समस्या रखी जा चुकी है वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत और सत्ता के जनप्रतिनिधियों के सहयोग से धड़ल्ले से फर्जी अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है। अब इन अस्पतालों की एम्बुलेंस धड़ल्ले से जिला अस्पताल पहुंचती हैं और जिन मरीजों को बीएचयू या ट्रामा सेंटर रेफर किया जाता है उन्हें इन फर्जी अस्पतालों के दलाल बहला फुसलाकर अपने यहां लेकर चले जाते हैं। ऐसा ही एक अस्पताल जे.के.मेमोरियल हास्पिटल दिलदारनगर में है जिसकी निदेशिका नीतू वर्मा हैं। इनके पास कोई अपनी डिग्री नहीं है।
इनके यहां 19 मई 2017 को निकहत बानो जिनकी डिलीवरी होनी थी उसको वाराणसी के डाक्टरों द्वारा इलाज की बात कहकर इस अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन दर्द बढ़ने पर नीतू वर्मा ने खुद ही उसका आपरेशन कर बच्चा पैदा कराया लेकिन इनकी लापरवाही के चलते 20 मई को निकहत की मौत हो गयी जिसके बाद परिजनों व स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया और अस्पताल की निदेशिका नीतू वर्मा के खिलाफ धारा 304,323,420 और मेडिकल काउंसिल 15(3) के तहत मुकदमा दर्ज हुआ और उसके बाद अस्पताल को सीज किया गया बावजूद इसके आज भी उस अस्पताल में मरीजों का धड़ल्ले से स्थानीय जनप्रतिनिधि, भाजपा नेता व विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से इलाज किया जा रहा है।मीडिया के कैमरे में यह मामला तब कैद हो गया जब उक्त अस्पताल का एम्बुलेंस जिला अस्पताल में खड़ा मिला। मीडियाकर्मियों ने जब जानने की कोशिश की तो पता चला कि एक महिला जो जली अवस्था में बर्न वार्ड में भर्ती थी जिसे यहां के डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिये वाराणसी के बीएचयू के लिये ऱेफर किया था पर वह बीएचयू न जाकर इनके झांसे में आकर इनके एम्बुलेंस से इनके अस्पताल पहुंच गई। एम्बुलेंस के ड्राइवर ने भी स्वीकार किया कि नीतू वर्मा ने मुझे यहाँ भेजा है। वहीं मरीज के परिजन ने बताया कि हम अपने मरीज को जे.के. मेमोरियल अस्पताल ले जा रहे हैं क्योंकि जिला अस्पताल में इलाज नहीं हो पा रहा है।
गाजीपुर के जिला अस्पताल में नहीं है बर्न वार्ड
वहीं जब इस मामले पर बताते हुये ड्यूटी पर तैनात डाक्टर जे.पी. राय ने बताया कि शबाना खातून नाम की महिला जो कि 90 प्रतिशत जली हुई थी को 14-9-17 को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। उसकी हालत ठीक नहीं थी इसलिये कल उसे उसी समय वाराणसी रेफर करने की बात कही था पर परिजन इसके लिये तैयार नहीं हुए। साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि जले हुये मरीज को बर्न वार्ड में ही रखा जा सकता है। ध्यान देने योग्य बात है कि जे.के.मेमोरियल अस्पताल में बर्न वार्ड है ही नहीं।
दलालों के चंगुल में है जिला अस्पताल
सीएमओ को गाजीपुर जिला अस्पताल में हो रही असुविधाओं से अवगत कराया गया तो वे बात करने में कतरा रहे थे। कहा कि जेके मेमोरियल अस्पताल का रिनीवल कर दिया गया है। लेकिन इस अस्पताल पर अभी मुकदमा चल रहा है। लेकिन मामला यह है कि जिला अस्पताल दलालों के बस में है और फर्जी अस्पताल भी विभागीय अधिकारियों के मिलीभगत से धड़ल्ले से चल रही है।
जिला अस्पतालों में दलालों की होगी जांच: डीएम
सीएमओ के जवाब के बाद डीएम ने तत्काल सीएमओ को इन अस्पतालों की जांच का निर्देश दिया। कहा कि ऐसी शिकायत दिलदारनगर सहित कई जगहों से मिल रही है। जिनके विरूद्ध आपराधिक मामलों में मुकदमा दर्ज है। पहले तो लाइसेंस निरस्त किया गया फिर उनका रिनीवल कर दिया गया या नये नाम से लाइसेंस दे दिया गया है। जिन अस्पतालों के लाइसेंस जारी किये गये हैं उनकी पूरी सूची तलब की जाय और अनियमितता पाये जाने पर कार्यवाही की जायेगी। जिला अस्पताल में दलालों के प्रवेश की भी शिकायत मिली है इसकी भी जांच की जायेगी।
इनपुट- गाजीपुर से आलोक त्रिपाठी की रिपोर्ट
Published on:
06 Oct 2017 01:42 pm
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