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Ghazipur News: थाने में हो रही थी अवैध वसूली, एसपी दरोगा सहित 18 पुलिस कर्मियों पर एफआईआर, मचा हड़कंप

चंदौली जिले के मुगलसराय थाने के प्रभारी निरीक्षक रहे शिवानंद मिश्रा समेत 18 पुलिस कर्मियों पर गाजीपुर के नंदगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। यह फिर कोर्ट के निर्देश पर 27 नवंबर को कराई गई।

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UP Police News: चंदौली जिले के मुगलसराय थाने के प्रभारी निरीक्षक रहे शिवानंद मिश्रा समेत 18 पुलिस कर्मियों पर गाजीपुर के नंदगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। यह फिर कोर्ट के निर्देश पर 27 नवंबर को कराई गई।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्वप्न आनंद की अदालत ने बर्खास्त मुख्य आरक्षी अनिल कुमार सिंह की अर्जी पर सुनवाई करते हुए पुलिस वालों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया था। नंदगंज थाने में चंदौली के तत्कालीन एसपी सहित कुल 18 पुलिसकर्मियों पर केस 27 नवंबर को केस दर्ज किया गया है। यह मामला शिकायतकर्ता अनिल कुमार सिंह की ओर से अपने ही विभाग के लोगों की ओर से अवैध वसूली की सूची वायरल करने से जुड़ा हुआ है।

इस घटना की सूचना रजिस्टर्ड डाक से अनिल की ओर से पुलिस अधीक्षक गाजीपुर को दी गई। कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय में प्रार्थना-पत्र दिया गया। अनिल के प्रार्थना-पत्र पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने बीते 21 सितंबर को सभी सम्बंधित पुलिस वालों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया था।

इस मामले में 27 नवंबर को गाजीपुर के नंदगंज थाना में तत्कालीन एसपी के साथ कुल 18 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। कोर्ट ने इस पूरे मामले के जांच के आदेश दिए थे। नंदगंज थाने में 18 पुलिसकर्मियों के खिलाफ संगीन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

पुलिस ने धारा 147, 219, 220, 342, 364, 389, 4 468, 471 और 120-बी के तहत मुकदमा दर्ज किया है। नंदगंज पुलिस की इस कार्रवाई से पूरे महकमे में हड़कम्प मचा हुआ है।

बताते चलें कि वाराणसी के मडुवाडीह थाना के शिवशंकर नगर के रहने वाले मुख्य आरक्षी अनिल कुमार सिंह ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अर्जी दी। उन्होंने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक चंदौली और प्रभारी निरीक्षक मुगलसराय शिवानंद मिश्रा पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था। अनिल की ओर से लगाये अनुसार के अनुसार प्रतिमाह नियम विरुद्ध वसूली विभाग के पुलिस विभाग कुछ लोगों के ओर से करायी जा रही थी।

अवैध वसूली लिस्ट अनिल कुमार सिंह ने सोशल मीडिया पर वायरल दिया था। ऐसा करते हुए अनिल ने दावा किया था कि उन्होंने भ्रष्टाचार को उजागर किया है। इस पूरे म की जांच डीआईजी को दी गयी थी। उन्होंने अनिल की से लगाये गए आरोपी को सही पाया था। अनिल का आरोप था कि उनकी भ्रष्टाचार उजागर करने की गतिविधियों से नाराज होकर इसके बाद बदले की भावना से योजनाबद्ध तरीके 8 जुलाई 2021 को गलत तरीके से झूठे मुकदमे में फंसाने की साजिश रची गयी। जबकि कोतवाली चंदौली इंस्पेक्टर के हमराही ने इसका पर्दाफाश कर दिया था। अनिल ने अपनी अर्जी में इस बात का जिक्र किया था कि भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले मंजूनाथ, अमित जेठवा, सत्येंद्र कुमार दुबे, सतीश शेट्टी, शशिधर की हत्याएं कर दी गईं।

अनिल की भी हत्या करने के लिए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक चंदौली अमित द्वितीय और स्वाट टीम प्रभारी इंस्पेक्टर राजीव कुमार सिंह, सर्विलांस प्रभारी एसआई अजित कुमार सिंह, थानाध्यक्ष बबुरी एसआई सत्येंद्र विक्रम सिंह, हेड कांस्टेबल आनंद सिंह, कांस्टेबल अमित कुमार यादव, कांस्टेबल भुल्लन यादव, चालक स्वाट टीम कांस्टेबल राणा प्रताप, आनंद कुमार गौड़ 5 सितंबर 2021 शाम साढ़े 5 बजे सफेद रंग की बोलेरो से सादी वर्दी में अनिल की ससुराल नंदगंज थाना, जिला गाजीपुर के बड़हरा गांव पहुंचे। अनिल के अनुसार उनका अपहरण कर लिया गया था।

उनके अपहरण की सूचना उनकी बेटी खुशबू ने 112 नंबर डायल पुलिस को दी थी। इसके साथ ही नंदगंज थाना पुलिस को सूचित किया। इससे आवेदक (अनिल) की जान बच गई। लेकिन योजनाबद्ध तरीके से पद और पावर का दुरुपयोग कर अनिल को दो दिन कस्टडी में रखकर बीते 7 सितंबर 2021 पशु क्रूरता अधिनियम के तहत थाना बबुरी से चालान कर दिया।

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