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Indian Army Jobs : सेना में भर्ती होना है तो चले जाइए गहमर, सीखिए कैसे होती है तैयारी

Indian Army Jobs- उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के गहमर गांव में औसतन हर घर में इंडियन आर्मी के जवान हैं और नवयुवक आर्मी भर्ती की तैयारी कर रहे हैं

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Indian Army jobs private training center in gahmar village of up

Indian Army Jobs : सेना में भर्ती होना है तो चले जाइए गहमर, सीखिए कैसे होती है तैयारी

गाजीपुर. Indian Army Jobs- गाजीपुर का गहमर एशिया का सबसे बड़ा गांव है। इसकी आबादी डेढ़ लाख के करीब है। इस गांव में 15 हजार से ज्यादा भूतपूर्व सैनिक रहते हैं। वर्तमान में गांव 12 हजार से अधिक जवान तीनों सेनाओं में सैनिक से लेकर कर्नल तक कार्यरत हैं। गांव के हर घर में फौजियों की वर्दियां और मेडल टंगे हैं। होश संभालते ही इस गांव का हर बच्चा सुबह-शाम दौड़ना शुरू कर देता है। पुशअप-लंबी कूद और कसरत इनकी दिनचर्या में शामिल है। गहमर गांव में सैनिक बनने की प्रक्रिया प्रथम विश्व युद्ध से शुरू हुई जो अब तक जारी है। इसीलिए इसे देश में सबसे ज्यादा फौजियों वाले गांव की उपाधि मिली है।

सुबह-सुबह पीटी-परेड
गहमर के रवि प्रताप सुबह-सुबह दंड बैठक करते हुए मिले। पसीने से लथपथ रवि ने बताया मेरी तीन पीढिय़ां फौज में रही हैं। मुझे भी फौज में जाना है। रवि को विश्वास है कि वह इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करते ही फौज में भर्ती हो जाएंगे। गाजीपुर जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर गंगा किनारे बसा गहमर गांव 8 वर्ग मील में फैला है। यह 22 पट्टियों यानी टोलों में बंटा है। हर टोले में रवि की ही तरह दर्जनों युवाओं की आंखों में सुनहरे भविष्य का सपना है। कोई एयरमैन की तैयारी में जुटा है, कोई नाविक तो कोई जवान बनना चाहता है। बहुत सारे युवा एनडीए और सीडीएस की तैयारी में जुटे हैं। इसके लिए गांव के भूतपूर्व सैनिक युवाओं को निशुल्क कोचिंग देते हैं। किताबी ज्ञान से लेकर फिजिकल तैयारी सब कुछ यहां दिनभर चलती रहती है।

हर जंग में शामिल रहे यहां के फौजी
दोनों विश्वयुद्ध हो या फिर 1965 व 1971 की भारत-पाकिस्तान जंग। और बाद में कारगिल की लड़ाई, गहमर के फौजियों ने हर जंग में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। द्वितीय विश्व युद्ध में गांव के 228 सैनिक अंग्रेजी सेना में शामिल थे। 21 को वीरगति मिली। इनकी याद में गहमर मध्य विद्यालय के मुख्य द्वार पर शिलालेख लगा है। गांव की महिलाएं कहती हैं देश सेवा के लिए पुरुषों को भेजना गर्व की बात है।

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गहमर स्टेशन पर छावनी का नजारा
गहमर गांव में डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय, माध्यमिक विद्यालय, प्राथमिक विद्यालय और स्वास्थ्य केंद्र हैं। गहमर रेलवे स्टेशन पर दो दर्जन से अधिक गाडिय़ां रुकती हैं। सैनिकों की इतनी आवाजाही है कि स्टेशन छावनी जैसा लगता है। गांव में राजपूतों की आबादी ज्यादा है।

1530 में बसा था गांव
गांव 80 वर्षीय सेना के रिटायर्ड सूबेदार हरिकेश बताते हैं कि 1530 में सकरा डीह नामक स्थान पर कुसुम देव राव ने गहमर गांव बसाया था। यहां प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर भी है। यह पूर्वी यूपी व बिहार के लोगों के आस्था का केन्द्र है। मां कामाख्या गांव की कुलदेवी हैं।

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