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बीस साल बाद मांग पूरी, दुल्लहपुर रेलवे स्टेशन पर लिच्छवी एक्सप्रेस का ठहराव

ढोल नगाड़े के साथ स्टेशन पर पहुंचकर जश्न मनाया

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बीस साल बाद मांग पूरी, दुल्लहपुर रेलवे स्टेशन पर लिच्छवी एक्सप्रेस का ठहराव

गाजीपुर. शनिवार को दुल्लहपुर रेलवे स्टेशन पर लिच्छवी एक्सप्रेस के ठहराव के साथ ही जनपदवासियों की बीस साल पुरानी मांग पूरी हो गई। उत्साहित लोगों ने बैंड बाजा, ढोल नगाड़े के साथ स्टेशन पर पहुंचकर जश्न मनाया।

बतादें कि बिहार के मुजफ्फरपुर से चलकर दिल्ली जाने वाली लिच्छवी एक्सप्रेस का ठहराव मऊ रेलवे स्टेशन के बाद सीधे वाराणसी स्टेशन पर था। जिस कारण तकरीबन 100 किलोमीटर की आबादी को इस ट्रेन से यात्रा करने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। सन 2000 में पहली बार गाजीपुर जिले में इस ट्रेन के ठहराव की मांग की गई। लेकिन रेलवे के अधिकारियों ने कभी इस पर अमल नहीं किया।

2014 में केन्द्र में मोदी सरकार बनी तो गाजीपुर के सांसद मनोज सिन्हा को रेल राज्यमंत्री बनाया गया। अपने सांसद को रेल मंत्रालय मिलने के बाद जिले के लोगों को थोड़ा बल मिला। लगने लगा की उनकी मांग पूरी हो जाएगी। आखिरकार मनोज सिन्हा के प्रयास से दो साल पहले गाजीपुर के जखनियां रेलवे स्टेशन पर लिच्छवी ट्रेन के ठहराव की अनुमति मिल गई। अब दुल्हपुर रेलवे स्टेशन पर लिच्छवी के ठहराव के साथ ही बीस साल पुरानी मांग भी पूरी हो गई। जिसका फायदा हजारों लोगों को मिलेगा।

एक दिन पहले ही ठहराव का ऐलान हुआ था

दुल्लहपुर स्टेशन पर लिच्छवी ट्रेन के ठहराव की जानकारी एक दिन पहले मंडल रेल प्रबंधक वाराणसी (परिचालन) ने पूर्वोत्तर रेलवे सलाहकार समिति के सदस्य अनिल पांडेय को दी। इसकी जानकारी मिलने के बाद ही इलाके के लोगों में खुशी का माहौल रहा। इस ठहराव से गाजीपुर जिले के 72 गांवों के लोगों को सीधा फायदा होगा।

आजमगढ़ के लोगों को भी होगा लाभ

दुल्हपुर स्टेशन गाजीपुर- आजमगढ़ के सीमा पर स्थित है। यहां ट्रेन का ठहराव होने से आजमगढ़ जिले के भी तककीबन 60 गांवों के लोगों को बिहार व दिल्ली की यात्रा करने में आसानी हो सकेगी। शनिवार को अनिल पांडेय ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया साथ ही ट्रेन के चालक और गार्ड को मिठाई भी खिलाई गई।