8 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

6 फीट 3 इंच जमीन में दफ्न हुआ गैंगेस्टर मुख्तार अंसारी, छोटे बेटे और भाई-भतीजों ने दी मिट्टी

मुख्तार अंसारी को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया है। माफिया डॉन के जनाजे में भारी भीड़ उमड़ी है। मुख्तार को उसके अम्मी-अब्बू की कब्र के पास दफनाया गया। सुबह करीब 10 बजे मुख्तार के शव को कब्रिस्तान ले जाया गया। कब्रिस्तान के दरवाजे के बाहर लोगों की भीड़ लगी रही। मुख्तार को 6 फीट 3 इंच जमीन में दफ्न किया गया। गैंगस्टर को उसके छोटे बेटे उमर और भाई-भतीजों ने मिट्टी दी।

3 min read
Google source verification
Mukhtar Ansari Last Ride

जनाजा उठने से पहले छोटे बेटे उमर ने मुख्तार के मूंछों को आखिरी बार ताव दिया। जनाजे के वक्त भारी पुलिस बल तैनात रहा।

माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को गाजीपुर के उसके घर के पास वाले कब्रिस्तान में दफ्न कर दिया गया। अपनी जिंदगी में अपार जमीन पर कब्जा करने वाले मुख्तार को आखिरकार 6 फिट 3 इंच जमीन में दफना दिया गया। मुख्तार की 63 साल की उम्र में मौत हुई। इन 63 में से 19 साल मुख्तार ने जेल में ही काटा। साल 2005 से वह लगातार जेल में ही था। बीते 28 मार्च की रात बांदा जेल से अस्पताल ले जाते वक्त उसकी मौत हुई थी। डॉक्टरों ने मौत का कारण हार्ट अटैक बताया है। बीते कुछ समय से वो बीमार था। उसे पेट दर्द और पेशाब में जलन की शिकायत थी। हालांकि मौत के 5 दिन पहले उसने कोर्ट में याचिका देकर कहा था कि उसे स्लो पॉइजन यानी धीमा जहर दिया जा रहा है। मौत के 2 ‌दिन पहले बांदा जेल के जेल और डिप्टी जेलर को भी सस्पेंड किया गया था। इसके पीछे ही मुख्तार की सुरक्षा में लापरवाही कारण ही बताया गया। मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी ने भी मीडिया को दिए गए बयान में कहा, 'शैतान मेरे भाई को मारने की कोशिश कर रहा है।'

28 मार्च की रात करीब 10 बजे मौत के बाद अगले दिन यानी 29 मार्च को पांच डॉक्टरों के पैनल ने मुख्तार का पोस्टमार्टम किया। इस दौरान कागजी कार्रवाई और सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं करने में पूरा दिन लग गया। क्योंकि वो एक सजायाफ्ता कैदी था। तीन अलग-अलग मामलों में से उसे दो में उम्रकैद और एक में 10 साल की सजा सुनाई जा चुकी थी जो उसकी मौत के साथ ही समाप्त हो गई। इसलिए पूरे दिन उसकी सभी फाइलों की कार्रवाई करके ही देर शाम परिवार को शव सौंपा जा सका। 29 मार्च की आधी रात को उसका शव उसके पैतृक निवास गाजीपुर पहुंचा। परिवार ने तय किया कि उसे अगली सुबह यानी 30 मार्च की सुबह 10 बजे कालीबाग कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा। फिर शनिवार को उसे उसके अम्मी-अब्बू की कब्र के बगल में दफनाया गया।


इससे पहले मुख्तार को मिट्टी देने के लिए गाजीपुर के मोहम्मदाबाद में भारी भीड़ उमड़ी। मुख्तार अंसारी के धर से युसुफपुर के कालीबाग तक सड़कों पर लोगों का मजमा लगा रहा। भीड़ को संभालने के लिए यूपी पुलिस समेत अन्य सुरक्षा बलों को भी लगाया। गाजीपुर के जिलाधिकारी आर्यका अखौरी, पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह भी खुद मौके पर मौजूद रहे।

मुख्तार के घरवालों में उसके बड़े भाई और गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी, मोहम्मदाबाद के पूर्व विधायक सिबगतुल्लाह अंसारी, मुहम्मदाबाद विधायक भतीजे सुहेब उर्फ़ मन्नू अंसारी, छोटा बेटा उमर अंसारी के हाथ से मिट्टी नसीब हुई।


मुख्तार अंसारी का बड़ा बेटा अब्बास अंसारी उसका ज्यादा करीबी था। वह पिता के दिखाए हुए अपराध के रास्ते पर चल पड़ा था। लेकिन आखिरी मौके पर वो अपने बाप को मिट्टी भी नहीं दे पाया। वह भी अलग-अलग मामलों में बागपत जेल में बंद है। उसकी मां यानी मुख्तार की पत्नी भी कई मामलों में आरोपित है और फरार है। उसके ऊपर 75 हजार रुपए का इनाम है। वह भी अपने शौहर के जनाजे में नहीं शामिल हुई। अब्बास की पत्नी यानी मुख्तार की बहू निखत अंसारी जमानत पर बाहर हैं लेकिन जनाजे की सामने आई किसी तस्वीर में उन्हें नहीं देखा गया। हालांकि वह आईं या नहीं इसकी पुष्टि नहीं हो पाई।


मुख्तार अंसारी का बेटा उमर अपने घर पर लोगों से बात करते हुए रो पड़ा। दरअसल, वह अपने पिता के जनाजे के बारे में लोगों को बता रहा था कि कब दफनाया जाएगा। घर पर मौजूद लोगों से प्रार्थना करने की बात करते हुए वह भावुक हो उठा। हालांकि उसने जनाजा उठने के पहले अपने अब्बू के मूंछों को ताव दिया। क्योंकि मुख्तार हमेशा अपनी मूंछों को ताव देता था।

इसी के साथ उत्तर प्रदेश और खासकर के पूर्वी यूपी का एक बाहुबली नेता और गैंगस्टर का अंत हो गया।