
दिलदारनगर
गाजीपुर. दिलदारनगर का 330 साल पूरा होने पर एक संस्था ने एक शहीद परिवार और शिक्षा के उत्थान में प्रतिभावान छात्रों को सम्मानित किया है। गाजीपुर का दिलदारनगर जिसकी बुनियाद 330 साल पहले मोहनिया के समहुता गांव के कुंवर नवल सिंह मुगल शासन काल में औरंगजेब बादशाह के शासनकाल में परगना जमानिया और चैनपुर की जागीरदरी मिली थी। वे बाद में नवल सिंह से दिनदार खान हुए और इस इलाके को 7 मुहर्रम 1110 हिजरी को 592 रुपया में खरीद दीनदारनगर को बसाया। जो बाद में दिलदार नगर हो गया।
आज इसी के याद में लोक सेवा समिति मोहनिया जो नवल सिंह के मूल सरजमी की संस्था है। ये अपने उस महान सख्सियत के याद में दिलदारनगर इलाके में देश के लिए शहीद हुए जवानों को खोजने का काम किया। जिनकी वजह से आज हम चैन की सास ले रहे है। इस खोज के दौरन दर्जन भर ऐसे परिवार मीले जो आज़ाद हैं फौज, 1965,1971 कारगिल के साथ ही कई जंग लड़ चुके है। कार्यक्रम में शामिल शाहिद परिवार मोहम्मद निसार 1965 , माना सिंह यादव 1971 ,अब्दुल गफ्फार शाह 1971, शहीद विजय नारायण सिंह 1971 , शहीद सफीउल्लाह 1971 , जहांगीर खान छत्तीसगढ़ माओवादी हमला 2010 के परिजन को इस संस्था ने एक मंच पर बुला उनके परिजनों का स्वागत और सम्मान किया। जिन्हें हम आज पूरी तरह से भूल चुके है।
कुंवर नसीम खान-वंशज दीनदार खां रमेश जायसवाल-सचिव लोक सेवा समिति कर्नल चंद्रदेव मिश्रा विओ- इन शहीद परिवारों के सम्मान समारोह में उस शहीद का परिवार भी शामिल हुआ जो आज़ाद हिंद फौज में नेता जी के बहुत करीबी थे जिनका नाम कैप्टन अब्दुल गनी खां था। जो अंतिम दिनों में सुबाष चंद्र बोष के साथ थे और प्लेन क्रैश के वक़्त उनके साथ थे। नेता जी की तरह इनकी मौत भी आज एक पहेली है क्योंकि आज तक इनका भी शव नही मिला।
By- Alok Tripathi, Ghazipur
Published on:
30 Oct 2017 02:52 pm
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