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गाजीपुर जिला अस्पताल में एकमात्र तैनात सर्जन ने दिया इस्तीफा

सीएमओ ने बताया सख्ती का असर, चिकित्सक बोले अधिक काम का दबाव एवं तनाव

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District Hospital

जिला अस्पताल

गाजीपुर. सूबे की योगी सरकार जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, तो वहीं सरकारी अस्पताल चिकित्सकों की कमी से स्वयं ही मरीज बनते जा रहे हैं। चिकित्सकों का अभाव पहले से था ही, जो तैनात हैं, वह भी अब इस्तीफा देने लगे हैं। कुछ ऐसा ही हुआ है गाजीपुर के जिला चिकित्सालय में। अस्पताल में तैनात एकमात्र सर्जन डॉ जेपी राय ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा सीएमओ को सौंप दिया है।

बतादें कि डॉ राय के इस्तीफे की पुष्टि करते हुए सीएमओ गिरीश चन्द्र मौर्य ने कहा कि जिला अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा बाहर की महंगी दवाईयां लिखीं जा रही हैं और प्राइवेट प्रैक्टिस की निरंतर शिकायतें मिल रही थीं। कहा कि शिकायत के आधार पर जिला अस्पताल के सीएमएस को निजी प्रैक्टिस पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश देते हुए स्पष्टीकरण देने को कहा था। डॉ राय का इस्तीफा इसी सख्ती का परिणाम हो सकता है। उनके नर्सिंग होम के संचालन करने की भी शिकायत थी।

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कहा कि शासन का सख्त रूख देख अपने निजी चिकित्सालय का अबाध संचालन करने के उद्देश्य से भी इस्तीफा दिया गया हो, यह भी हो सकता है। वहीं, अपने इस्तीफे के संबंध में डॉ जेपी राय ने कहा कि पिछले डेढ़ साल से मै अकेले सर्जन के रूप में काम कर रहा हूं। अधिक काम करने के कारण अपने परिवार और बच्चों को समय नहीं दे पा रहा था। उन्होंने कहा कि अपने परिवार और बच्चों को समय दे सकूं, इसीलिए इस्तीफा दिया।


अपने त्याग पत्र में डॉ जेपी राय ने लिखा है कि मेरे ऊपर काम का अतिरिक्त दबाव है। जिला चिकित्सालय का अकेला सर्जन होने के नाते इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक, सभी दायित्वों का निर्वहन बगैर अवकाश के करता आ रहा हूँ। अत्यधिक कार्य, तनाव एवं अवकाश नहीं मिल पाने के कारण कम उम्र में ही सुगर और ब्लड प्रेसर जैसी बीमारियों का शिकार हो गया हूं। मैं शारीरिक और मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं प्रताड़ित महसूस कर रहा हूँ, इसलिए अपने पद से त्याग पत्र दे रहा हूँ।

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होता था केवल प्राथमिक उपचार
गाजीपुर जिला अस्पताल को ऐसे ही यहां के लोग रेफर अस्पताल नहीं बताते। लोग बताते हैं कि जिला अस्पताल में एक्सिडेंटल या गन शॉट का कोई भी मरीज पहुंचता था तो तत्काल प्राथमिक उपचार कर वाराणसी के लिए रेफर कर दिया जाता था। डॉ राय की तैनाती सर्जन के पद पर थी, लेकिन वो एक्सीडेंटल आदि मरीजों को तत्काल रेफर करते थे। ये सर्जन साहब कोई रिस्क नहीं लेना चाहते, अगर किसी को भर्ती कर भी लिया तो बाहर की महंगी दवाएं ही लिखते।

By- Alok Tripathi