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लावारिश लाश का वारिश है ये नौजवान, अपने पैसे से कर चुका है 100 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार

तीन साल में कर चुका है 100 से अधिक लावारिश शव का अंतिम संस्कार, गरीबों की सेवा को ही मानता है जीनव का आधार

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आलोक त्रिपाठी की रिपोर्ट…

गाजीपुर. ‘लावारिश’ महज एक शब्द नहीं है। इंसानी दुनियां की एक ऐसी सच्चाई है जिसे सुनते ही जेहन में एक ऐसे व्यक्ति का चेहरा सामने आता है जिसका दुनियां में कोई नहीं होता। पर जनपद गाजीपुर में एक नौजवान ऐसे लोगों का ही वारिश है।

 

जी हां इस युवा का नाम है कृष्णानन्द उपाध्याय बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में होनहार रहे कृष्णानंद को हमेशा से ही गरीबों की मदद करने में खासी रूचि रही। मोहम्मदाबाद थाने के शाहपुर उसरी गांव के रहने वाले कृष्णानन्द उपाध्याय के बारे में लोग बताते हैं कि समाजसेवा से इनका ऐसा लगाव रहा कि ये गरीबों की मदद के लिए कई लोगों को साथ जोड़कर और उनसे चंदा इकट्ठा कर किसी गरीब के ईलाज तो किसी के लिए कपड़े और भोजन का इंतजाम कराते रहते थे।

 

धीरे-धीरे वक्त बीतता गया और सामाजिक कार्य में कृष्णानन्द की रूचि बढ़ने लगी। उन्होने लावारिशों के वारिश बनने का संकल्प लिया। कृष्णानन्द की मानें तो उन्हे य़े लगता था कि उनकी मदद तो हर कोई करता है जिसका इस दुनियां में कोई है। पर हमें उनके लिए काम करना होगा जिनका कोई नहीं है।

 

ऐसे में कृष्णानन्द ने लावारिश शवों के अंतिम संस्कार करने का बीड़ा उठाया। तकरीबन तीन साल पहले की एक घटना ने कृष्णानन्द ने कृष्णानन्द के मन पर ऐसा प्रभाव डाला कि उस घटना ने उन्हे हमेशा के लिए बदल डाला।

 

उस घटना का जिक्र करते हिए कृष्णानन्द बताते हैं कि एक लावारिश लाश जिसका अंतिम संस्कार पुलिस विभाग को करना था। पर पुलिस के लोगों ने शासन से मिला पैसा जेब में रख दिया और रिक्शे पर लदवाकर शव को नाले में फेंकवा दिया। हालांकि इस घटना का खुलासा होने पर जिलाधिकारी ने संबन्धित पुलिसकर्मी को निलंबित करने का आदेश दे दिया। पर इसी हादसे ने इस युवा को झकझोर कर रख दिया।

 

उसी दिन के बाद से ही इस युवा ने लावारिश लाश के अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाया। अब इस मुहिम की शुरूआत के तीन साल बीत गये हैं। अब तक इस नौजवान ने 100 से अधिक लावारिश शव का अंतिम संस्कार कर ये साबित कर दिया है कि दुनियां में नि:स्वार्थ भाव से भी सेवा करने को लोग अपनी कमाई मानते हैं।

कृष्णानंद की टीम में 108 सदस्य

पत्रिका से बातचीत कृष्णानंद ने बताया कि वो गरीब असहाय नाम से एक संगठन चलाते हैं। जिसमें 108 सदस्य मिल-जुलकर काम करते हैं। इनकी टीम को किसी लावारिश के बारे में पता चलता है ये लोग उसको जैसी जरूरत होती है वैसी सुविधा उपलब्ध कराते हैं। साथ ही उसकी पूरी देखभाल करते हैं। यही नहीं किसी लावारिश की मौत हो जाती है तो ये लोग उसके शव को पोस्टमार्टम हाउस से कानूनी प्रक्रिया पूरी करके लेते हैं और उसका अंतिम संस्कार उचित तरीके से करते हैं। पर खास बात ये ही कि कृष्णानंद और उनकी टीम के लोग इस काम के लिए किसी भी सरकारी गैर सरकारी या राजनैतिक लोगों की मदद नहीं लेते हैं। ये सभी लोग आपस में पैसे इकट्ठा कर लोगों लावारिशों की मदद करने का काम करते हैं।