
किंग बनने के खूनी खेल ने पूर्वांचल की धरती को रक्तरंजित कर दिया। उसी का नतीजा था उसरी चट्टी कांड, जिसमें मुख्तार अंसारी के काफिले पर जानलेवा हमला हुआ। हमले में ताबड़तोड़ तड़तड़ाते हुए AK- 47 राइफलें गरजी थीं।
मामला साल 2001 का है। 15 जुलाई को मोहम्मदाबाद के उसरी चट्टी पर मुख्तार अंसारी के काफिले पर हमला हुआ। जिसमें 2 लोगों की ऑन द स्पॉट मौत हो गई थी। पूरे घटना का आरोप बाहुबली बृजेश सिंह पर लगा। यूपी की राजनीती में मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह एक दूसरे के जानी दुश्मन कहे जाते हैं।
पूर्वांचल में डेवलपमेंट के लिए इनवेस्टमेंट आ रहा था। इसमें ठेकेदारी पाकर हर कोई पैसा कमाना चाह रहा था। ठेकेदारी के चक्कर में दुश्मनी बढ़ी और फिर बात मर्डर तक पहुंच गई। शुरुआती एक-दो मर्डर ने बाद में गैंगवार का रूप ले लिया।
सबमें पूर्वांचल के किंग बनने की होड़ लगी थी। किंग बनने के खूनी खेल ने पूर्वांचल की धरती को रक्तरंजित कर दिया। उसी का नतीजा था उसरी चट्टी कांड, जिसमें मुख्तार अंसारी के काफिले पर जानलेवा हमला हुआ। हमले में ताबड़तोड़ तड़तड़ाते हुए AK- 47 राइफलें गरजी थीं।
आइए पूरी कहानी में उतरते हैं...
उसी उसरी चट्टी कांड में बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को जोर का झटका लगा था। गाजीपुर की MP-MLA कोर्ट में 3 जनवरी को इस मामले में सुनवाई हुई, जिसमें गवाह तौकीर ने आरोपी बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह को पहचानने से इनकार कर दिया।
वहीं मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह इस मामले में कोर्ट में पेश नहीं हुए, सुरक्षा कारणों से 21 साल बाद दोनों का आमना-सामना नहीं हो पाया। इस मामले पर अब अगली सुनवाई 10 जनवरी यानी आज के दिन के लिए तय की गयी थी। तब अदालत ने 10 जनवरी को मुख्तार को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा था।
दरअसल ये मामला 15 जुलाई 2001 का है जब मोहम्मदाबाद के उसरी चट्टी पर मुख्तार अंसारी के काफिले पर हमला हुआ था। ये हमला बाहुबली नेता बृजेश सिंह, त्रिभुवन सिंह और उनके साथियों के द्वारा हमला कराने का आरोप है।
इस हमले में 2 लोगों की ऑन द स्पॉट मौत हो गई थी। इसी मामले में आज मुख्तार और बृजेश की आमने-सामने पेशी होनी थी, अगर ये दोनों आज पेशी के लिए आते तो 21 साल बाद पहली बार ऐसा होता जब ये दोनों जानी दुश्मन एक दूसरे के आमने-सामने होते। लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते उनकी पेशी नहीं हो पाई थी।
गवाही में पाला बदलकर गवाह तौकीर ने खेला गेम, बृजेश के लिए राहत की बात
गवाह तौकीर ने अदालत में पिछली पेशी में अभियोजन पक्ष का समर्थन किया था। मुख्तार और बृजेश को आज पर्सनली पेश होना है। इसकी वजह है कि उनके सबूतों की गवाही होनी है। इससे पहले बृजेश हमेशा से अदालत की सुनवाई में आते रहे हैं। इस बार भी वो अदालत में पेश होने के लिए आए।
जानिए क्या है उसरी चट्टी का कांड…
साल 2001, तारीख थी 15 जुलाई, जब मुख्तार अंसारी अपने काफिले के साथ अपने विधायकी वाले क्षेत्र में जा रहे थे, तभी मोहम्मदाबाद के पास उसरी चट्टी पर घात लगाकर बैठे बृजेश सिंह ने आधुनिक बंदूकों से हमला कर दिया था।
इस हमले में मुख्तार अंसारी के गनर रामचंद्र की मौत हो गई थी जबकि उनके साथ रुस्तम घायल हो गए थे, बाद में मेडिकल ट्रीटमेंट के दौरान उनकी भी मौत हो गयी थी। लियाकत अली इस केस में मुख्तार के वकील हैं।
Published on:
10 Jan 2023 01:24 pm
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