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गोंडा में चल रहा था ‘नकली DEF फैक्ट्री’ का खेल, छापेमारी में खुला बड़ा राज… भारी मात्रा में सामग्री बरामद

गोंडा में नकली DEF बनाने की फैक्ट्री का बड़ा खुलसा हुआ है। छापेमारी में सब्सिडी वाले यूरिया से घातक घोल बनाने का भंडाफोड़ हुआ है। मौके से भारी मात्रा में सामग्री बरामद हुई है।
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गोंडा

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Mahendra Tiwari

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Updated: 9 Apr 2026, 9:11 PM IST

प्लांट में छापेमारी करते अधिकारी फोटो सोर्स विभाग

प्लांट में छापेमारी करते अधिकारी फोटो सोर्स विभाग

गोंडा जिले के छपिया ब्लॉक के सकदरपुर गांव में अवैध तरीके से डीजल एग्जॉस्ट फ्लूइड (DEF) तैयार करने का मामला उजागर हुआ है। कृषि विभाग की टीम ने अचानक छापेमारी कर मौके से संदिग्ध तरल पदार्थ, यूरिया और उपकरण बरामद किए। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इस अवैध निर्माण में सब्सिडी वाले यूरिया का इस्तेमाल किया जा रहा था। जो कानून का गंभीर उल्लंघन है।

गोंडा जिले के विकास खंड छपिया के ग्राम सकदरपुर में एक अवैध DEF (डीजल एग्जॉस्ट फ्लूइड) निर्माण इकाई का भंडाफोड़ होने से हड़कंप मच गया। जिला कृषि अधिकारी एवं उर्वरक अधिसूचित प्राधिकारी सी.पी. सिंह के नेतृत्व में पहुंची टीम ने छापेमारी कर कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए। छापेमारी के दौरान प्लांट बंद मिला, लेकिन बाहर खुले में रखे चार सफेद कंटेनर और एक बड़ी काली टंकी ने संदेह बढ़ा दिया। इन कंटेनरों में भरे तरल पदार्थ से तेज यूरिया जैसी गंध आ रही थी, जिससे टीम को अवैध निर्माण की आशंका हुई। मौके पर मौजूद दो युवकों—दुर्गेश और विजय—ने पूछताछ में बताया कि वे जनरेटर ठीक करने आए थे। जो राकेश पाण्डेय नाम के व्यक्ति द्वारा किराए पर लिया गया था। जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस चौकी बभनान के प्रभारी और ग्राम प्रधान को बुलाया गया। उनकी मौजूदगी में जब बंद कमरे का ताला तोड़ा गया। तो अंदर का नजारा चौंकाने वाला था। कमरे में 36 खाली यूरिया की बोरियां

DEF बनाने के लिए तकनीकी ग्रेड यूरिया की जगह सब्सिडी वाला का किया जा

(एचयूआरएल कंपनी) और बिखरा हुआ यूरिया मिला। इसके अलावा छोटे कंटेनरों में तैयार यूरिया घोल भी पाया गया। एक अन्य कमरे में पूरा प्लांट स्थापित था। जिससे स्पष्ट हुआ कि यहां लंबे समय से अवैध गतिविधि चल रही थी। टीम ने मौके से बरामद सभी सामान को सील कर दिया और मकान मालिक व ग्राम प्रधान रमेश मिश्र को सुपुर्द कर दिया। जांच में यह भी सामने आया कि DEF बनाने के लिए तकनीकी ग्रेड यूरिया की जगह सब्सिडी वाला कृषि यूरिया इस्तेमाल किया जा रहा था। जो उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 का उल्लंघन है। मुख्य आरोपी राकेश पाण्डेय फिलहाल फरार है। उसका मोबाइल बंद बताया जा रहा है। कृषि विभाग ने उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन ने साफ किया है कि इस तरह की अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ सख्त अभियान जारी रहेगा। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।