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आरिफ के बाद कल्लू का दीवाना हुआ सारस, पूरे गांव से दोस्ती, प्यार से जो भी बुलाता सबके पास जाता

अमेठी के आरिफ और सारस की दोस्ती की कहानी आप लोगों ने सुना होगा। अब हम गोंडा के कल्लू और सारस की कैसे दोस्ती हुई। यह जानकर आपको हैरानी होगी।

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गोंडा के कल्लू और सारस

अमेठी के आरिफ और सारस की दोस्ती की कहानी जग जाहिर है। अब हम आपको गोंडा के कल्लू और सारस की एक नई दोस्ती की कहानी बताने जा रहे हैं। जिसे जानकर आपको हैरानी होगी। इस गांव में सारस सबसे पहले घायल अवस्था में तालाब में पड़ा मिला। खेत देखने गए कल्लू को तरस आई। वह उसे घर ले आया। इलाज करने के बाद जब वह ठीक हो गया। तब कल्लू उसे लेकर फिर तालाब में छोड़ आया। लेकिन कल्लू के घर पहुंचने से पहले सरस उसके घर पहुंच गया। पूरे गांव के लोग उसे प्यार करते हैं। हर घरों में वह इंसान की तरह घूमता है।

अमेठी के आरिफ और सारस की दोस्ती के बाद गोंडा के कल्लू और सारस की दोस्ती सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है। दरअसल गोंडा जिले के बभनजोत ब्लॉक की ग्राम पंचायत मन्नी के रहने वाले कल्लू और सारस की अनोखी दोस्ती देखने को मिली है। सारस करीब डेढ़ वर्षो से तालाब में न रहकर गांव में रहता है। सारस की सिर्फ कल्लू से ही नहीं बल्कि पूरे गांव से दोस्ती हो गई है। हर घर के आंगन में वह इंसान की तरह घूमता है। गांव का प्रत्येक सदस्य उसे प्यार करता है। इंसानों के बीच रहने वाले यह बेजुबान अब आसपास के क्षेत्र में लोगों के चर्चा का विषय है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के पूरब स्थिति तालाब में यह जख्मी अवस्था में मिला था। उसे उठाकर लाये घाव पर प्रतिदिन मरहम लगाकर ठीक किया। तब से सारस गांव में इंसानों के बीच रहने लगा है।

कैसे हुई सारस और कल्लू की दोस्ती उसके बाद पूरे गांव का बन गया दोस्त

गांव के ही रहने वाले कल्लू ने बताया कि यह सारस पक्षी उन्हें गांव के पूरब तरफ स्थित नान तालाब में जख्मी अवस्था में जमीन पर पड़ा हुआ था। उसके बाद घर लेकर आए और उसका दवा इलाज किया। इलाज के कुछ दिन बाद घाव भर जाने के बाद उसे तालाब पर छोड़कर आए। वह घर नहीं पहुंचे कि गांव में सारस पक्षी उनसे पहले पहुंच गया। कई बार ऐसा करने के बाद भी वापस गांव में चला आता था। कुछ दिन के बाद उसके पंख में चोट लग गया। उसका भी उन्होंने इलाज किया। अब वह इसी गांव में रहने लगा। लोगों के घरों में और बाहर टहलता घूमता है। गांव के लोग उसे अब बहुत प्यार करते हैं। गांव के सभी लोगों से उसकी दोस्ती हो गई है। गांव का कोई भी व्यक्ति उसे आवाज देकर बुला लेता है। वह उनके पास चले जाता है। यही नहीं लोगों के कहने पर खूब मगन होकर थिरकने लगता है। उन्होंने बताया कि अब पूरे गांव वाले उसे अपना परिवार का सदस्य मानते हैं।

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