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आपके मन को मोह लेगी अरंगा पर्वती झील, विदेशी पक्षियों का दीदार करने के लिए सैलानियों का आना शुरू

गोंडा जिले के वजीरगंज में स्थित अरंगा पर्वती झील अपने आगोश में मनमोहक दृश्यों को समेटे है

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Aranga Parvati Lake

गोंडा. मनमोहक दृश्य को अपने आगोश में समेटे स्वर्ग की अनुभूति कराने वाले अरंगा पर्वती झील पर फिलहाल अभी खामोशियों का आलम बरकरार है। बावजूद इसके सैलानियों की नजरें अभी से ही इस झील पर टिकी हुई हैं, जहां तमाम रंग-बिरंगे विदेशी पंक्षियों का झुण्ड आकर झील पर विचरण करते हैं। पक्षियों के कोलाहल से सम्पूर्ण झील गुंजायमान रहता है, जिसे देख हर कोई कुछ पलों के लिए इन हसीन नजारों मे खो जाता है।

वजीरगंज क्षेत्र के ग्राम लक्ष्मणपुर, गौरिया व तिखड़िया के मध्य स्थित मन को मोह लेने वाला हर दिल अजीज अरंगा पर्वती झील पक्षी विहार में अभी तक खामोशियों का आलम बरकरार है। बावजूद इसके सैलानियों का आवागमन अभी से ही शुरू हो चुका है। यहां विदेशी पंक्षियों का विचरण न देख इनके चेहरों पर उदासी की लकीरें साफ दिखाई देती हैं।

दिसबंर में गूंजेगा पक्षियों का कोलाहल
झील के सर्वे के दौरान यहां उपस्थित एक विभागीय कर्मचारी ने बताया कि अभी यहां पक्षियों का आगमन नहीं हुआ है। दिसम्बर के प्रथम सप्ताह से विदेशी पंक्षियों का आगमन शुरू हो जाएगा, जो जनवरी तक यहां अपना डेरा डालते हैं।

ये पक्षी आते हैं यहां
दिसम्बर माह की ठण्ड शु0रू होते ही अरंगा झील के जल पर जहां विदेशी पंक्षी नकटा, सुर्खाब, काज, चट्टा, मुर्गाबी, आदि पहुंचकर विचरण करते हैं, वहीं अन्य पक्षियों मे ब्राउन तीतर, ब्लैक तीतर, लाल मोनिया, अमरका, जंगली मैना, लाल मोनिया, नीलकंठ, छपका, धनेश, सारस, बाज, चील, बगुला आदि का भी कोलाहल बरकरार रहता है।

पेयजल सुविधा व वाटर बोट बने हाथी के दांत
यहां सैलानियों की प्यास बुझाने के लिए लगा सरकारी नल व पेय जल की टोटियां हाथी के दांत बने हुए हैं, जिसके चलते पर्यटकों को अपने प्यास पर काबू रखना पड़ता है। यहां विगत कई दिनों से नल व पेयजल की टोटियां खराब है। और तो और नौका विहार हेतु यहां रखे वाटर बोट भी कई महीनों से खराब है, जिसका कोई भी पुरसा हाल नहीं है।

बजट का होता है बन्दर बांट
चर्चा है कि उक्त अरंगा पर्वती झील (पक्षी विहार) के सौंदर्यकरण हेतु आये धन का बन्दर बांट हो जाने के कारण इसके रख-रखाव में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बावजूद इसके सम्बंधित विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हैं। काश! स्वर्ग की अनुभूति कराने वाले अरंगा पर्वती झील पर भी पर्यटक विभाग की नजरें समर्पित होती तो यहां का नजारा कुछ और ही होता।