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डीएम ने शासन को भेजी रिपोर्ट, कोतवाल को दो साल तक प्रदेश के किसी भी थाने का चार्ज न देने की संस्तुति

जमीन कब्जेदारी के मामले में डीएम ने जांच कराई। कोतवाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई। डीएम ने उत्तर प्रदेश शासन को रिपोर्ट भेज कर कोतवाल को 2 साल तक प्रदेश के किसी भी थाने का चार्ज न देने संस्तुति की है।  

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जिलाधिकारी बलरामपुर

बलरामपुर जिले के उतरौला पुलिस की जमीन कबजेदारी के मामले में मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। जांच में पुलिस की भूमिका पर कई सवाल उठ रहे हैं। डीएम अरविंद सिंह ने शासन को रिपोर्ट भेज कर उतरौला कोतवाल को 2 साल तक प्रदेश के किसी भी थाने का चार्ज न दिए जाने की संस्तुति की है।

बलरामपुर जिले के उतरौला कोतवाली क्षेत्र के हाटन रोड के रहने वाले राम प्रताप वर्मा के घर में 2 माह पहले आरोप है कि पुलिस ने मिलकर दूसरे का कब्जा करा दिया। प्रकरण डीएम के संज्ञान में आने के बाद होली के दो दिन पहले प्रशासन ने तुलसीपुर सर्किल की पुलिस अधिकारियों की टीम के साथ भेज कर पीड़ित को न्याय दिला दिया। डीएम ने टीम गठित कर पूरे मामले की जांच कराई तो उतरौला पुलिस की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद डीएम ने पुलिस पर कार्रवाई शुरू कर दी है। बता दें कि यह प्रकरण हाई कोर्ट और सिविल न्यायालय में विचाराधीन था। उसके बाद भी पुलिस ने दूसरे पक्ष को कब्जा दिलाने में कई हथकंडे अपनाए। डीएम बलरामपुर उतरौला पुलिस की करतूत से काफी नाराज हैं। हाई कोर्ट की तरफ से कड़ी टिप्पणी के बाद पुलिस पर कार्रवाई तेज कर दी है। जांच रिपोर्ट में यह तथ्य सामने निकल कर आया कि पुलिस ने अपनी भूमिका नहीं निभाई। सबसे खास बात यह है कि पुलिस ने पीड़ित के खिलाफ ही रिपोर्ट दर्ज कर ली। ताकि पीड़ित पक्ष पूरे मामले में सामने ना आ सके। मजिस्ट्रेटियल जांच की रिपोर्ट आने के बाद डीएम ने उतरौला कोतवाल की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर शासन को रिपोर्ट भेज कर कोतवाल संजय दुबे को 2 साल तक प्रदेश के किसी भी थाने का चार्ज न देने की संस्तुति की है। जिससे पुलिस की मुश्किलें बढ़ती जा रहे हैं। अब जमीन कबजेदारी के प्रकरण में उतरौला पुलिस की काफी किरकिरी हो रही है।