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बेसिक शिक्षा विभाग ने तैयार की विशेष वर्कशीट अब सुगमता से पाठ्यक्रम पूरा कर सकेंगे नौनिहाल जाने इसकी विशेषता

गोंडा अब सरकारी विद्यालयों का कमजोर से कमजोर बच्चा भी बहुत आसानी से सीखते हुए अपना पाठ्यक्रम पूरा कर सकेगा। प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से ऐसी वर्कशीट तैयार कराई जा रही है, जिसे कोई भी बच्चा, चाहे वह सीखने में अक्षम हो या स्लो लर्नर हो या उसके सुनने और बोलने में बाधा हो अथवा बौद्धिक रूप से कमजोर हो, घर पर माता- पिता की मदद ना मिल पा रही हो; तो भी उसे हताश नही होना पडेगा।

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अब वह नवीन कार्यपुस्तिका का इस्तेमाल करके बच्चे खुद से अपने सीखने की गति बढ़ा सकेंगे।

उत्तर प्रदेश में ऐसे कई लाख बच्चे हैं, जो अपनी शारीरिक मानसिक कमजोरियों के चलते सामान्य पाठ्यक्रम पूरा नहीं कर पाते हैं और पिछड़ जाते हैं। इन्ही विशेष बच्चों की दिक्कतों को महसूस करते हुए स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद ने इनके लिए एक विशेष सुगम्य वर्कशीट तैयार कराने का निर्णय लिया है।

गोण्डा के विशेषज्ञ शिक्षक रघुनाथ पाण्डेय सहित प्रदेश के चुनिन्दा 12 शिक्षकों व शिक्षाधिकारियों के समूह को सुगम्य वर्कशीट निर्माण की जिम्मेदारी दी गयी है। राज्य परियोजना कार्यालय के विशेषज्ञ आर एन सिंह तथा यूनिसेफ के राज्य सलाहकार महेंद्र द्विवेदी की देखरेख में कक्षा 4 और 5 की हिंदी और गणित के लिए विशेष वर्कशीट के निर्माण में इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि अधिगम अक्षम या श्रवण बाधित या वाणीदोष अथवा अल्पदृष्टि वाला बच्चा भी सामान्य बच्चों की तरह इन कार्यपत्रकों पर स्व निर्देशित होकर काम कर सके और अपेक्षित दक्षता प्राप्त कर सके। यह वर्कशीट अन्य कार्यपुस्तिकाओं से भिन्न होगी, क्योंकि इसकी प्रत्येक शीट थीम आधारित होगी, जिसमें अलग-अलग विधाओं में दिए गए संदर्भ को बच्चा सुगमता से समझते हुए भर लेगा।

वर्कशीट निर्माण करने में राज्य संदर्भ समूह के सदस्य रघुनाथ पांडेय के साथ अमेठी के बच्चाराम वर्मा, बरेली के अनिल चौबे, गोरखपुर के प्रवीण मिश्र, हरदोई के हर्षेन्द्र सिंह,अमर बहादुर सिंह, बहराइच की आंचल पांडेय, सहारनपुर की नीलू चोपड़ा,भावना पांडेय,जीबीनगर की श्वेता सोमवंशी, बाराबंकी के विवेक मिश्र को विशेष जिम्मेदारी दी गई है, जिस पर समूह ने तत्परता से काम भी शुरू कर दिया है। इस हेतु नोडल अधिकारी उपशिक्षा निदेशक डाॅ पवन सचान के नेतृत्व में लखनऊ में आयोजित कार्यशाला में प्रभावी रणनीति और रूपरेखा तैयार कर ली गई है। विद्यालयों में ट्रायल करने के बाद अगली कार्यशालाओं में अंतिम रूप दिया जाएगा।