
गोण्डा. प्रदेश सरकार ने हौसला पोषण योजना की तर्ज पर अब शबरी संकल्प योजना की सौगात दी है। सूबे के 29 जनपदों में यह योजना लागू की जा रही है। इन 29 जनपदों के 73793 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पंजीकृत 709012 धात्री महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए अब सीधे उनके खाते में धनराशि भेजी जायेगी।
शुरूआती दौर में कुपोषण की जंग से जूझ रहे सूबे के अति जोखिम उन्तीस जनपदों का चयन किया गया है। इस योजना के तहत उन गरीब महिलाओं का चयन किया गया है। जिन महिलाओं का जीवन दैनिक मजदूरी पर निर्भर है। ऐसी महिलाएं धात्री होने की दशा में उन्हें अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है तथा धात्री के दिनों में वे मजदूरी भी नही कर पाती है। ऐसी धात्री महिलाओं एवं उनके दो वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण दूर करना तथा स्वास्थ में सुधार लाना योजना का मुख्य उद्देश्य है। इससे मातृ शिशु एवं बाल मृत्यु दर भी कमी आयेगी इस योजना में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पंजीकृत धात्री महिलाये एवं उनके दो वर्ष तक के बच्चों को शामिल किया गया है।
ऐसी धात्री माता को पांच सौ रुपया प्रतिमाह 6 माह हेतु तीन हजार रुपये उनके बैंक खाते में भेजा जायेगा। 6 माह के बाद नवजात बच्चे के दो वर्ष होने तक पोषण के लिए 500 रुपये प्रतिमाह की दर से प्रत्येक 6 माह पर दिया जायेगा। इस योजना में वही महिलाएं पात्र होगी जिनकी आयु प्रसव के समय कम से कम 19 वर्ष हो तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पंजीकृत हो तथा उनका प्रसव संस्थागत सरकारी या निजी नर्सिंग होम में होना अनिवार्य है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को भी मिलेगा बोनस
सबरी संकल्प योजना में दो वर्ष का बच्चा लाभान्वित होने के पश्चात सामान्य श्रेणी में बना रहता है। मतलब बच्चा कुपोषण मुक्त रहता है तथा महिला पुनः गर्भवी नही होती है तो लाभार्थी महिला को 500रुपये की प्रोत्साहन धनराशि प्रदान की जायेगी तथा कार्यकर्ता को भी दो सौ रुपये बोनस दिया जायेगा।
ऐसे होगा आवेदन
जिन धात्री महिलओं को योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन करना होगा। उन्हें आवेदन पत्र पर बने घोषणा पत्र में इस बात की शपथ देनी होगी कि उनके पति केन्द्र, राज्य तथा पब्लिक सेक्टर में कर्मचारी नही है तथा उपयोग के लिए दी गयी धनराशि को बच्चे तथा धात्री महिला पर ही खर्च किया गया है। यदि इसमें कोई त्रुटि पायी जाती है तो धनराशि की वसूली के साथ-साथ विभाग को कानूनी कार्यवाही करने का अधिकार होगा।
योजना पर व्यय होगा दो सौ बासठ करोड़
इस योजना के तहत धात्री माताओं को दो जीवित प्रसव तक किया जाना है। समान्यतः कुल पंजीकृत धात्री महिलाओं की 60 प्रतिशत इस श्रेणी में आती है। कुल 29 जनपदों में करीब 7 लाख धात्री महिलाएं पंजीकृत जिसका 60 प्रतिशत करीब 42 लाख धात्री महिलाएं होती है। इन पर करीब दो सौ बासठ करोड़ के व्यय का अनुमान है।
इन जनपदों में लागू होगी योजना
जौनपुर, मिर्जापुर, कौसाम्बी, फतेहपुर, संत कबीरदास नगर, बांदा, कनौज, इटावा, फर्रुखाबाद, चित्रकूट, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, एटा, कासगंज, अलीगढ़, बदायूं, शांहजहाँपुर, पीलीभीत, बहराइच, गोण्डा, फैजबाद, श्रावस्ती, बाराबंकी, संत कबीर नगर, बलरामपुर, शिद्र्धाथ नगर, महराजगंज तथा बस्ती।
Published on:
15 Sept 2017 12:47 pm
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