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दलितों को बंधक बनाकर काम लेते हैं दबंग, पगार के बदले पड़ती है मार, देखें वीडियो

पीड़ितों ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार, कहा- हमारे बच्चों से भी काम करवाते हैं दबंग...

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dalit family complaint to sp gonda

गोण्डा. बात डिजिटल इंडिया की हो रही है। देश में समानता की चर्चा की जा रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में अभी भी एक ऐसा गांव है, जहां दलितों को बंधन बनाकर काम लिया जाता है। पगार मांगने पर इनकी बेरहमी से पिटाई की जाती है। इतना ही नहीं, दबंग दलितों के मासूम बच्चों से भी काम करवाते हैं और बेटियों से छेड़छाड़ भी करते हैं। दबंगों की यातना से परेशान करीब दर्जन भर दलित परिवार के लोगों ने एसपी से मिलकर न्याय की गुहार लगाई है। इन दलितों की व्यथा को जिसने भी सुना हैरान रह गया।

गोंडा जिले में देहात कोतवाली के खरगू चांदपुर के हरखापुर गांव में सरकारी कानून नहीं, बल्कि प्रधान के कुनबों की मर्जी चलती है। यहां आज भी दलितों को बंधक बनाकर काम लिया जाता है और पगार मांगने पर इनकी जमकर पिटाई की जाती है। आरोप है कि हरखापुर के ग्राम प्रधान अमरनाथ के लड़के दलितों को बंधक बनाकर इनसे काम लेते हैं। इनता ही नहीं दलित मजदूर जब इनसे पैसे मांगते हैं तो इन्हें बदले में मार खानी पड़ती है।

मासूमों से काम करवाते हैं और बेटियों से करते हैं छेड़छाड़
एसपी से मिलने आये शिव बालक, संतोष व तेली ने बताया कि हम लोग करीब पांच वर्षों से इन लोगों की बेगार करते चले आ रहे हैं। यदि कभी बुलाने पर हम नहीं पहुंचते हैं तो ये लोग घर पर चढ़कर पूरे परिवार को मारते-पीटते हैं और जबरन काम के लिए बुला लाते हैं। प्रधान के लोग हमारे मासूम बच्चों से भी काम लेते हैं। इतना ही नहीं दबंग हमारी मासूम बेटियों से छेड़छाड़ भी करते हैं। मना करने पर अपशब्दों का प्रयोग कर गांव छुड़ा देने की धमकी देते हैं।

पुलिस भी देती है दबंगों का साथ!
इसी रविवार को बेगार न करने पर दबंगों ने घर पर चढ़कर पूरे परिवार की बेरहमी से पिटाई की गई। पीड़ितों ने जब थाने में शिकायत की तो उन्हें वहां से डांटकर भगा दिया गया। प्रधान होने के कारण पुलिस इन पर कार्यवाई करने के बजाय हर बार मामले को रफा-दफा कर देती है। थाने पर सूचना देने के एवज में दबंगों ने मंगलवार की सुबह पुनः घर पर चढ़कर पिटाई की और घर पर रखा छप्पर भी उजाड़ दिया।

7 के बदले 70 हजार दिए, फिर भी अदा नहीं हुआ कर्ज : पीड़ित
पीड़ित तेली ने बताया कि वर्ष 2002 में किसी आवश्यक काम के कारण प्रधान से सात हजार रुपये उधार लिए थे। तबसे अब तक 70 हजार रुपए वापस कर चुके हैं, लेकिन कर्ज अदा नहीं हुआ। जबकि पूरा परिवार पिछले पांच सालों से इनके घर-खेतों में बेगार कर रहा है। एसपी ऑफिस से पीड़ितों को न्याय दिलाने का भरोसा मिला है।

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