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Gonda: डीएम का कड़ा एक्शन, जल जीवन मिशन के तहत 145 ग्राम पंचायत में बनी पानी टंकी और जलापूर्ति का होगा सत्यापन

Gonda News: गोंडा जिले में जल जीवन मिशन ग्रामीण के तहत बनाई गई पानी की टंकियां और जलापूर्ति को लेकर हर जगह कुछ ना कुछ लूप होल है। कहीं पाइप लाइन डालने के लिए सड़क खोदी गई है। उसको ठीक नहीं किया गया। इस मामले में डीएम ने कड़ा एक्शन लेते हुए निर्धारित प्रारूप पर स्थलीय सत्यापन के निर्देश दिए इसके लिए अलग-अलग अधिकारियों की टीम गठित की गई है।

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डीएम ने तिरंगा यात्रा में भाग लेने के लिए लोगों से की अपील

Gonda News: डीएम नेहा शर्मा ने जल जीवन मिशन (ग्रामीण) के तहत बनी जलापूर्ति परियोजनाओं की गुणवत्ता पर उठे सवालों को गंभीरता से लेते हुए एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की है। उन्होंने जिले की 145 ग्राम पंचायतों में निर्मित पानी की टंकियों, पाइपलाइन नेटवर्क और फंक्शनल हाउसहोल्ड कनेक्शन (FHTC) की सघन जांच के निर्देश दिए हैं। अधिशासी अभियंता, जल निगम (ग्रामीण) की रिपोर्ट में इन ग्राम पंचायतों में जलापूर्ति परियोजनाओं के शत-प्रतिशत पूर्ण होने की जानकारी दी गई है। इसके लिए 6 से 13 में तक अभियान चलाकर सत्यापन किया जाएगा।

Gonda News: जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो अधिकारियों की टीम गठित की जाए। जिसमें एक सत्यापन अधिकारी और एक तकनीकी अधिकारी शामिल होंगे। यह टीमें स्थल निरीक्षण करेंगी। यह सुनिश्चित करेंगी कि जलापूर्ति नियमित रूप से हो रही है। पाइपलाइन डालते समय टूटी सड़कों की मरम्मत की गई है। और कार्यदायी संस्थाओं द्वारा किए गए कार्य मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।

प्रत्येक विकासखंड के लिए अलग-अलग अधिकारियों को सौपी गई जिम्मेदारी

प्रत्येक विकास खंड में अलग-अलग अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। जैसे बेलसर ब्लॉक की जांच उपनिदेशक कृषि एवं अधिशासी अभियंता (सरयू ड्रेनेज खंड-3), छपिया ब्लॉक की जांच मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी एवं सहायक अभियंता (लघु सिंचाई), और कर्नलगंज ब्लॉक की जांच परियोजना निदेशक (डीआरडीए) एवं अधिशासी अभियंता (आवास विकास) करेंगे।

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निर्धारित प्रारूप पर देनी होगी रिपोर्ट

डीएम ने बताया कि सत्यापन के बाद, निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट तैयार कर जिला विकास अधिकारी को प्रस्तुत की जाएगी। जिससे समेकित आख्या तैयार की जा सके।
इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कदम शासन की योजनाओं की पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित की दिशा में एक निर्णायक पहल है।

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