
गोंडा जिले में जमीन घोटाले के मामले लगातार प्रकाश में आ रहे हैं। जमीन घोटाले के एक और मामले में डीआईजी के निर्देश पर 15 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। भू माफियाओं ने जाली दस्तावेजों के जरिए फर्जी वसीयत करा ली। इस बार मुकदमे में सदर तहसील के कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। फिलहाल अभी तहसील कर्मचारियों का नाम और पता अज्ञात है। एसआईटी अपनी विवेचना में तहसील कर्मियों के नाम का खुलासा करेगी।
मौत के 8 माह बाद कराई गई वसीयत
गोंडा जिले के नगर कोतवाली क्षेत्र के जानकी नगर निवासी मधु महरौत्रा ने आरोप लगाया कि उनके ससुर विश्वनाथ की मृत्यु 20 नवम्बर 1970 को हो गई थी। उन्होंने अपने जीवन काल में कोई वरासत नामा किसी को नहीं दिया है। खैरा निवासी सालिक राम ने ब्रजेश अवस्थी से मिलकर फर्जी वरासत नामा एक जुलाई 1970 का बनवाया है। जो पूरी तरफ से फर्जी है।
इन लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा
डीआईजी के आदेश पर ब्रजेश अवस्थी, सालिक राम, मशरूफ अहमद, संतोषी, अशोक कुमार शुक्ला, ताज मोहम्द, अधिवक्ता अनिल सिंह मुजेड़, राज कुमार लाल श्रीवास्तव, पार्वती, करिश्मा, शिवम यादव, ललितेश कुमार सिंह, उषा देवी, विमलेश , सरोज देवी, तहसील के कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।
अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने बताया कि गोंडा में जमीन घोटाले के मामले में 48 मुकदमे पहले से ही दर्ज है। एक महिला की शिकायत पर 15 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें कुछ तहसील के कर्मचारी भी शामिल है। पूरे मामले की विवेचना एसआईटी कर रही है।
Published on:
20 Feb 2023 10:50 am
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