
पिंडी के रूप में विराजमान मां की प्रतिमा
अत्याचारी राजा के आतंक से जनमानस को राहत दिलाने के लिए मां भगवती ने बहू का रूप धारण कर डोली में सवार होकर जा रही थी। अत्याचारी राजा ने दुस्साहस किया तो मां ने अत्याचारी राजा का वध कर अंतर्ध्यान हो गई।
गोंडा जिले के इटियाथोक ब्लॉक मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर मेहनौन ग्राम पंचायत में स्थित मां पटमेश्वरी देवी का प्राचीनतम स्थान है। सदियों से यह स्थान भक्तों के आस्था का केंद्र बना हुआ है। मां पटमेश्वरी एक अत्याचारी राजा का बध जनमानस को मुक्ति दिलाया था। मेहनौन उस समय जंगल का क्षेत्र हुआ करता था। राजा का वध करने के बाद मां भगवती की पूजा होने लगी। मां भगवती स्वयं जंगल क्षेत्र में एक पिंडी के रूप में विराजमान हो गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस सिद्ध पीठ पर भक्तों के सभी प्रकार की मुरादें पूरी होती हैं। नवरात्र ही नहीं पूरे वर्ष यहां पर मां के भक्तों का पहुंचने का सिलसिला लगा रहता है। जनपद ही नहीं बल्कि आस-पास जिलों के अनेक श्रद्धालु भी मंदिर में दर्शन कर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
अत्याचारी राजा का वध कर मां पटमेश्वरी हो गई अंतर्ध्यान
मंदिर के पुजारी बताते हैं करीब 400 वर्ष पहले यहां पर बाकड़ नाम का एक राजा हुआ करता था। जो की बहुत ही अत्याचारी था।बताया यह भी जाता है,कि इस क्षेत्र से गुजरने वाली नवविवाहिता की डोली को राजा रुकवा लेता था। उन वधुओं से दुराचार भी करता था। इससे क्षेत्र की जनता में उसको लेकर आक्रोश था। राजा की ताकत के सामने किसी की भी हिम्मत आवाज उठाने की नहीं रही।कहते है, कि इसी दौरान एक नवविवाहित कन्या का डोला गुजरने पर राजा ने उसे रोक लिया। दुस्साहस करने की कोशिश की तो वधू ने राजा की तलवार से उसका सर कलम कर दो टुकड़े कर दिए। स्वयं अंतर्ध्यान हो गईं। तभी से वह मां पटमेश्वरी के नाम से विख्यात हुईं। इसके बाद से यहां पूजा अर्चना शुरू हो गई। जो कि अब तक चली आ रही है। यह स्थान आज सैकड़ों वर्ष बाद भी मां भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। नवरात्रि में तो यहां पर प्रतिपदा से पूर्णमासी तक 15 दिनों तक भारी संख्या में दूर-दराज से भक्तों की भीड़ पूजा-अर्चना के लिए आती है।
भगवान शिव ने यहां किया रात्रि विश्राम
सतीसह महादेव: मेहनौनं मपुस्थितम्।एक रात्रो स्थित्वा च पुनर्गत: अगस्त्याश्रमम्। संतो की मानें,तो इस स्थान के बारे में पुराणों में वर्णित इस श्लोक से पता चलता है,कि एक बार अगस्त मुनि के आश्रम में राम कथा सुनने जाते समय भगवान शंकर माता सती के साथ में मेहनौन स्थित मां पटमेश्वरी के स्थान पर गुप्त रूप से रात्रि निवास किया था। इसी कारण यह स्थान गुप्तेश्वरी देवी आज मां पटमेश्वरी के नाम से विख्यात हुआ है।भगवान शंकर ने अयोध्या से प्रयाग होते हुए महर्षि अगस्त्य आश्रम में जाकर राम कथा का रसपान किया था।
यहां पर कई प्रकार की सुविधाएं
मेहनौन के प्रसिद्ध मंदिर पर आने वाले देवी भक्तों की सुविधा के लिए कई प्रकार की व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर में रात्रि विश्राम के लिए आगंतुकों को धर्मशाला, जलपान, भोजन और फलाहार की व्यवस्था है। मेला प्रशासन ने यहां पर स्नान ग्रह, सार्वजनिक शौचालय और पानी आपूर्ति की व्यवस्था कर रखी है।यहां कथा भागवत, मुंडन संस्कार जैसे अनेक धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं।
मां के आशीर्वाद से क्षेत्र अभिसिंचित
मेहनौन ग्राम पंचायत के प्रधान पति रामू सिंह बताते हैं, कि मां पटमेश्वरी ने संपूर्ण क्षेत्र को अपने आशीर्वाद से अभिसिंचित किया है।उन्होंने कहा,कि क्षेत्र में कोई भी मांगलिक कार्यक्रम बगैर माता के मंदिर आए और इनके आशीर्वाद लिए पूर्ण नहीं होता है। माता पटमेश्वरी का यह स्थान सिद्ध पीठ है।भक्तों को यहां कभी निराशा नहीं होती उनकी मनोकामना माता अवश्य पूर्ण करती हैं।
Published on:
27 Mar 2023 01:42 pm

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