2 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Gonda News : राजा का वध कर अंतर्ध्यान हो गई थी मां पटमेश्वरी, भगवान शिव ने यहां किया प्रवास, जानिए सिद्ध पीठ का इतिहास

गोंडा में मां का एक ऐसा मंदिर जिसका इतिहास बेहद खास है। पूरे वर्ष मां के दरबार में भक्तों की भीड़ जमा रहती है। इस प्राचीनतम सिद्ध पीठ का इतिहास सदियों पुराना है।

3 min read
Google source verification
पिंडी के रूप में विराजमान मां की प्रतिमा

पिंडी के रूप में विराजमान मां की प्रतिमा

अत्याचारी राजा के आतंक से जनमानस को राहत दिलाने के लिए मां भगवती ने बहू का रूप धारण कर डोली में सवार होकर जा रही थी। अत्याचारी राजा ने दुस्साहस किया तो मां ने अत्याचारी राजा का वध कर अंतर्ध्यान हो गई।

गोंडा जिले के इटियाथोक ब्लॉक मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर मेहनौन ग्राम पंचायत में स्थित मां पटमेश्वरी देवी का प्राचीनतम स्थान है। सदियों से यह स्थान भक्तों के आस्था का केंद्र बना हुआ है। मां पटमेश्वरी एक अत्याचारी राजा का बध जनमानस को मुक्ति दिलाया था। मेहनौन उस समय जंगल का क्षेत्र हुआ करता था। राजा का वध करने के बाद मां भगवती की पूजा होने लगी। मां भगवती स्वयं जंगल क्षेत्र में एक पिंडी के रूप में विराजमान हो गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस सिद्ध पीठ पर भक्तों के सभी प्रकार की मुरादें पूरी होती हैं। नवरात्र ही नहीं पूरे वर्ष यहां पर मां के भक्तों का पहुंचने का सिलसिला लगा रहता है। जनपद ही नहीं बल्कि आस-पास जिलों के अनेक श्रद्धालु भी मंदिर में दर्शन कर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

प्रसाद चढ़ाने के लिए लाइन में लगे श्रद्धालु IMAGE CREDIT: Patrika original

अत्याचारी राजा का वध कर मां पटमेश्वरी हो गई अंतर्ध्यान

मंदिर के पुजारी बताते हैं करीब 400 वर्ष पहले यहां पर बाकड़ नाम का एक राजा हुआ करता था। जो की बहुत ही अत्याचारी था।बताया यह भी जाता है,कि इस क्षेत्र से गुजरने वाली नवविवाहिता की डोली को राजा रुकवा लेता था। उन वधुओं से दुराचार भी करता था। इससे क्षेत्र की जनता में उसको लेकर आक्रोश था। राजा की ताकत के सामने किसी की भी हिम्मत आवाज उठाने की नहीं रही।कहते है, कि इसी दौरान एक नवविवाहित कन्या का डोला गुजरने पर राजा ने उसे रोक लिया। दुस्साहस करने की कोशिश की तो वधू ने राजा की तलवार से उसका सर कलम कर दो टुकड़े कर दिए। स्वयं अंतर्ध्यान हो गईं। तभी से वह मां पटमेश्वरी के नाम से विख्यात हुईं। इसके बाद से यहां पूजा अर्चना शुरू हो गई। जो कि अब तक चली आ रही है। यह स्थान आज सैकड़ों वर्ष बाद भी मां भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। नवरात्रि में तो यहां पर प्रतिपदा से पूर्णमासी तक 15 दिनों तक भारी संख्या में दूर-दराज से भक्तों की भीड़ पूजा-अर्चना के लिए आती है।

मां पटमेश्वरी देवी मंदिर IMAGE CREDIT: Patrika original

भगवान शिव ने यहां किया रात्रि विश्राम

सतीसह महादेव: मेहनौनं मपुस्थितम्।एक रात्रो स्थित्वा च पुनर्गत: अगस्त्याश्रमम्। संतो की मानें,तो इस स्थान के बारे में पुराणों में वर्णित इस श्लोक से पता चलता है,कि एक बार अगस्त मुनि के आश्रम में राम कथा सुनने जाते समय भगवान शंकर माता सती के साथ में मेहनौन स्थित मां पटमेश्वरी के स्थान पर गुप्त रूप से रात्रि निवास किया था। इसी कारण यह स्थान गुप्तेश्वरी देवी आज मां पटमेश्वरी के नाम से विख्यात हुआ है।भगवान शंकर ने अयोध्या से प्रयाग होते हुए महर्षि अगस्त्य आश्रम में जाकर राम कथा का रसपान किया था।

यह भी पढ़ें;नेपाल देश से शक्तिपीठ देवीपाटन पहुंची शोभायात्रा, जानिए कौन थे पीर रतन नाथ योगी, कैसे मिली पीर की उपाधि

यहां पर कई प्रकार की सुविधाएं

मेहनौन के प्रसिद्ध मंदिर पर आने वाले देवी भक्तों की सुविधा के लिए कई प्रकार की व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर में रात्रि विश्राम के लिए आगंतुकों को धर्मशाला, जलपान, भोजन और फलाहार की व्यवस्था है। मेला प्रशासन ने यहां पर स्नान ग्रह, सार्वजनिक शौचालय और पानी आपूर्ति की व्यवस्था कर रखी है।यहां कथा भागवत, मुंडन संस्कार जैसे अनेक धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं।

मां के दरबार में बंधा घंटा IMAGE CREDIT: Patrika original

मां के आशीर्वाद से क्षेत्र अभिसिंचित

मेहनौन ग्राम पंचायत के प्रधान पति रामू सिंह बताते हैं, कि मां पटमेश्वरी ने संपूर्ण क्षेत्र को अपने आशीर्वाद से अभिसिंचित किया है।उन्होंने कहा,कि क्षेत्र में कोई भी मांगलिक कार्यक्रम बगैर माता के मंदिर आए और इनके आशीर्वाद लिए पूर्ण नहीं होता है। माता पटमेश्वरी का यह स्थान सिद्ध पीठ है।भक्तों को यहां कभी निराशा नहीं होती उनकी मनोकामना माता अवश्य पूर्ण करती हैं।

Story Loader