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एक ऐसा स्थान जहां तुलसीदास के हाथों, लिखी रामचरितमानस की प्रतियां मौजूद, जानिए यहां तक कैसे पहुंचे

गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना करने के बाद अपने हाथों से लिखी रामायण अपने गुरु को भेंट किया था।

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गोंडा जिले के सूकर क्षेत्र स्थित राजापुर में गोस्वामी तुलसीदास तुलसी जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष स्वामी भगवताचार्य ने बताया कि तुलसीदास की जन्म भूमि को लेकर अब कोई भ्रम की स्थिति नहीं है।

तुलसी जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष स्वामी भगवताचार्य ने बताया कि तुलसीदास की जन्म भूमि को लेकर अब कोई भ्रम की स्थिति नहीं है।

सनातन धर्म सम्मेलन में दो जजों की उपस्थिति में हुआ निर्णय

उन्होंने कहा कि 31 मई 1960 को दिल्ली विश्वविद्यालय में हुई बैठक में एटा शोरो के विषय में कोई प्रमाण ना मिलने से वह जाली सिद्ध हो चुका है। तथा बांदा का राजापुर भी तुलसी की जन्मभूमि नहीं है। यह साबित हो चुका है। इसके बाद में लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में कार्यक्रम हुआ। जिसमें उच्च न्यायालय के दो जज और एटा शोरो, बांदा और गोंडा के लोग मौजूद रहे। जजों की बेंच ने खुला निर्णय दिया। जिसमें बांदा के 10 प्रतिशत लोगों को छोड़ दिया जाए, तो 90 प्रतिशत लोगों ने गोंडा के पक्ष में तर्क और प्रमाण दिए।

विद्वानों के कई सम्मेलन में गोंडा के राजापुर में तुलसी जन्मस्थली होने का दावा

सनातन धर्म से जुड़े लोगों का विश्व स्तरीय सम्मेलन किया। यह सम्मेलन गोंडा के तुलसी जन्मस्थली राजापुर में हुआ। इसके बाद दिल्ली और काशी विद्यापीठ बनारस में सम्मेलन हुए। इसमें निर्णय हुआ कि गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर बांदा नहीं बल्कि सूकर खेत राजापुर गोंडा हैं।

तुलसीदास के जन्म स्थली को लेकर बांदा के गजट को लेकर किया दावा

उन्होंने बांदा के राजापुर के विषय में तर्क देते हुए कहा कि बांदा के गजट में लिखा है, कि तुलसीदास वहां आए। इससे स्पष्ट होता है कि जब तुलसीदास वहां आए तो पैदा कैसे हुये। इंपीरियल गजट कोलकाता कहता है, कि बांदा के राजापुर को तुलसीदास ने बसाया था। सवाल किया कि जब यह नगर उन्होंने बताया था, तो वहां पैदा कैसे हुए।

भागवताचार्य बोले - बांदा में सूकर खेत नहीं और वहां की भाषा बुंदेली है

गोस्वामी तुलसीदास का जन्म 1554 में हुआ। उस समय बांदा के राजापुर का नाम विक्रमपुर था। राजापुर नहीं था। सन 1913 में विक्रमपुर का नाम कटा कर राजापुर कराया गया। वहां पर सूकर खेत नहीं है। वहां की भाषा बुंदेली है। गोंडा में राजापुर है। सूकर खेत है। यहां की भाषा अवधी है। कहा कि बांदा में जो अयोध्या कांड दिखाते हैं। सागर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ भागीरथ ने उसकी कार्बन डेटिंग कराई। तो वह 200 वर्ष पुराना निकला। यहां तुलसीदास के हाथों लिखा बालकांड रखा है। सुंदरकांड लखीमपुर में रखा है। गोंडा के सूकर खेत को विद्वानों ने स्वीकार किया है। यहां संगम तट पर तुलसीदास के गुरु नरहरिदास का आश्रम है।

तुलसीदास के गुरु नरहरीदास के आश्रम में मौजूद ग्रंथ

गोंडा के राजापुर सूकर खेत स्थित पसका में सरयू और घाघरा का संगम होता है। इसी संगम तट पर तुलसीदास के गुरु नरहरी दास का सैकड़ों वर्ष पुराना आश्रम है। इस आश्रम में गोस्वामी तुलसीदास के हाथों लिखी रामायण की प्रतियां मौजूद हैं। दावा किया जा रहा है कि यह प्रतियां तुलसीदास जी ने अपने गुरु नरहरिदास को गुरु दक्षिणा के रूप में दिया था।

वटवृक्ष शंख और कमंडल जी आश्रम में मौजूद

गोस्वामी तुलसीदास अपने शिष्यों को वट वृक्ष के नीचे राम कथा सुनाते थे वह वटवृक्ष भी संगम तट पर आज भी मौजूद है। उनके गुरु नरहरिदास के आश्रम में उनका कमंडल और शंख भी रखा है।

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