
गोण्डा. जिले में स्वास्थ्य विभाग का बुरा हाल है। आधे से अधिक आबादी झोला छाप डॉक्टरों के सहारे है। वर्ष 2017 में 56 नये डॉक्टरों की सौगात प्रदेश सरकार ने गोण्डा को दी थी, जिससे उम्मीद जगी थी कि गोण्डावासियों की दिक्कतें अब कम हो जायेंगी। लेकिन इनमें से केवल 32 डॉक्टरों ने ही कार्यभार ग्रहण किया। इसके कारण ग्रामीण इलाकों के साथ ही साथ जिला पुरुष एवं महिला अस्पताल में डॉक्टरों के पद रिक्त है।
गोंडा जिले में कुल 214 चिकित्सकों के पद हैं। 32 डॉक्टरों ने कार्यभार तो ग्रहण कर लिया, लेकिन इसके बाद ये छुट्टी पर चले गये। हालांकि मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यभार ग्रहण करने वाले डॉक्टरों के बारे में पीएचसी, सीएचसी के अधीक्षकों से कार्यभार ग्रहण करने वाले डॉक्टरों के सम्बन्ध में पत्र भेजकर उनके प्रतिदिन की उपस्थिति तथा हर दिन की ओपीडी की रिपोर्ट मंगा रहे हैं।
गोंडा जिले के एक चिकित्सक को प्रतिदिन 40 मरीज देखने होते हैं। सीएचसी, पीएचसी में कभी-कभी ये आंकड़ा पार हो जाता है और कभी-कभी नीचे भी रह जाता है। डॉक्टरों की कमी के कारण जिला पुरुष और जिला महिला में एक डॉक्टर को 100 से ज्यादा मरीज देखना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों से मांगी गयी सूचना के आधार पर मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यवाई के लिए बेताब है।
मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन काम करने वाले कुल 174 डॉक्टरों के पद सृजित हैं, जिसमें केवल 72 डॉक्टर ही अब तक जिले में थे। 56 डॉक्टरों के ज्वॉइन करने से यह संख्या 128 हो जाती है। लेकिन 32 डॉक्टरों के कार्यभार ग्रहण करने से 80 डॉक्टरों के पद अभी भी रिक्त हैं। यही नहीं पहले से तैनात 72 डॉक्टरों में 10 डॉक्टर पीजी कोर्स करने गये हैं, जिससे अब डॉक्टरों की संख्या 72 से बढ़कर 94 हो गई है।
मुख्य चिकित्साधिकारी कहते हैं
मुख्य चिकित्साधिकारी संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पीजी कोर्स में 30 प्रतिशत कोटे के बावजूद अगर डॉक्टर सरकारी नौकरी में नहीं आना चाहते हैं तो इसका सीधा मतलब होता है कि उन्हें सरकार की नौकरी रास नहीं आ रही है। यही नहीं ज्यादातर डॉक्टर तीन से चार स्थानों पर आवेदन करते हैं, जिसमें उन्हें यदि बड़ा अस्पताल या फिर शहर का अस्पताल मिल जाता है तो ज्वॉइन कर लेते हैं। लेकिन यदि उसे ग्रामीण क्षेत्र का अस्पताल मिलता तो वहां जाना पसंद नहीं करते। सरकारी अस्पताल में ज्यादा कार्य और वेतन कम होना भी एक कारण होता है कि सरकारी अस्पताल में चिकित्सक कार्यभार ग्रहण करना नहीं चाहते।
यह है डाक्टरों के तैनाती की स्थिति
हालांकि, जिला अस्पताल में कुल 28 डॉक्टर के पद सृजित हैं, लेकिन केवल 24 डॉक्टर ही तैनात है। इसी तरह महिला अस्पताल में 14 डॉक्टरों का पद सृजित है, लेकिन केवल 6 डॉक्टर ही तैनात है। 16 सीएचसी और 50 पीएचसी पर 174 डॉक्टरों का पद सृजित है लेकिन 72 डॉक्टर ही तैनात हैं। इस प्रकार 214 डॉक्टर के सापेक्ष 103 डॉक्टर तैनात हैं, जबकि 111 डॉक्टरों के पद खाली हैं।
Published on:
31 Jan 2018 02:17 pm

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