
स्वास्थ्य विभाग में नियम कानून नहीं जिम्मेदारों की मर्जी चलती है। आरटीओ से लेकर जिलाधिकारी तक सीएमओ को निर्देशित कर चुके हैं कि स्वास्थ्य विभाग में लगे सभी वाहनों का फिटनेस करा लें। लेकिन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी किसी की नहीं सुनते हैं। हालत तो यहां तक है कि जिस गाड़ी से प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक चलते हैं उस गाड़ी के कोई कागजात या फिटनेस नहीं है। शव वाहन तथा ब्लड बैंक में लगी बस के ना तो फिटनेस हैं ना ही कोई कागजात विभागीय जानकार बताते हैं कि इसका रजिस्ट्रेशन तक नहीं हुआ है। फिर भी यह सारे वाहन मरीज व अधिकारियों की जान जोखिम में डालकर सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं।जिस विभाग के कंधों पर जिले के करीब 40 लाख आबादी के स्वास्थ्य की देखभाल जिम्मेदारी है।उस विभाग में चलने वाली सरकारी एंबुलेंस मानक विहीन और बिना फिटनेस के सड़कों पर दौड़ रही हैं। ऐसे में अगर एंबुलेंस में बैठे मरीज व उनके परिजनों के साथ कोई अनहोनी हो जाए। तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा इन ढेर सारे अनसुलझे सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पास नहीं है। संभागीय परिवहन विभाग समय-समय पर अभियान चलाकर एंबुलेंस का चालान और सीज करने की कार्रवाई करता है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के मुखिया अपने सरकारी एंबुलेंस के फिटनेस के बारे में अनजान है। फिलहाल आरटीओ ने अभियान चलाकर स्वास्थ्य विभाग की अनफिट व बिना प्रदूषण की चल रही एंबुलेंस का चालान कर सीज करने की कार्रवाई में जुटी हुई है। अब तक 20 एंबुलेंस का चालान के साथ चार एंबुलेंस सीज भी किया जा चुका है। इस संबंध में एआरटीओ बबीता वर्मा ने बताया कि शासन की गाइड लाइन के अनुसार सभी सरकारी विभागों की गाड़ियों का फिटनेस होना है। नहीं तो ऐसी गाड़ियों का चालान किया जाएगा।
Published on:
14 Sept 2022 06:48 pm
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