
दुख हरण नाथ मंदिर पर जलाभिषेक के लिए लगी लाइन
Gonda: Kajri Teej यूपी के गोंडा जिले में कजरी तीज पर्व को लेकर पांडव कालीन ऐतिहासिक दो प्रमुख पृथ्वी नाथ और दुखहरण नाथ मंदिर पर रविवार की शाम से शुरु हुआ जलाभिषेक का सिलसिला सोमवार की शाम तक चलता रहा। इस दौरान दोनों मंदिरों को मिलाकर करीब 10 लाख श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।
Gonda: Kajri Teej यूपी के गोंडा जिले में कजरी तीज का पर्व कुशल पूर्वक संपन्न हो गया है। कर्नलगंज के सरयू नदी से जल भरकर नंगे पैर करीब 10 लाख श्रद्धालुओं ने पृथ्वी नाथ और दुखहरण नाथ मंदिर पर जलाभिषेक किया। इस पर्व को सकुशल संपन्न करने के लिए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा के बंदोबस्त किए गए थे। सरयू घाट से लेकर गोंडा के दुख हरण नाथ मंदिर और खरगूपुर के पृथ्वी नाथ मंदिर तक मेले की सुरक्षा के लिए 3 हजार पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इसके अलावा सरयू घाट पर दो कंपनी फ्लड पीएससी के अलावा कई जनपदों से आए एडिशनल एसपी रैंक तक के अधिकारी सुरक्षा की कमान संभाले थे।
एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, जमीन के अंदर 64 फीट, जानिए ऊपर की लंबाई
गोंडा शहर से 30 किलोमीटर दूर खरगूपुर कस्बे के निकट पृथ्वीनाथ मंदिर में भगवान शिव के साक्षात दर्शन होते हैं। यह दावा मंदिर के महंत का है। मंदिर के महंत ने बताया कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान इस विराटतम शिवलिंग की स्थापना भीम ने किया था। यह शिवलिंग साढ़े 5 फुट ऊंचा है।
पांडव अपनी मां कुंती के साथ रहते थे, एशिया महाद्वीप का सबसे विराटतम शिवलिंग यहीं पर पृथ्वीनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग एशिया महाद्वीप का सबसे विराटतम शिवलिंग है। प्राचीनतम समय में इस क्षेत्र में पांडव अपनी मां कुंती के साथ रहते थे। इस क्षेत्र के लोग ब्रह्म राक्षस से पीड़ित थे। भीम ने उसका वध कर दिया था। अभिशाप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के मार्गदर्शन के बाद भगवान शिव की उपासना के लिए इस विराटतम शिवलिंग की स्थाप
ना किया था।
जमीन के अंदर 64 फीट और ऊपर साढ़े 5 फीट ऊंचा शिवलिंग
पुरातत्व विभाग की मानें तो एशिया महाद्वीप का सबसे बड़े शिवलिंग है। जिसकी जमीन के अंदर 64 फीट गहराई है। जबकि जमीन के ऊपर साढ़े 5 फीट ऊंचा है। पृथ्वी सिंह के सपनों में आए भगवान, फिर बनवाया यह मंदिर
महंत बताते हैं कि खरगूपुर के राजा गुमान सिंह के अनुमति से यहां के पृथ्वी सिंह ने मकान निर्माण के लिए खुदाई शुरू की, उसी रात स्वप्न में पता चला कि जमीन के नीचे सात खंडों में शिवलिंग है। स्वप्न के अनुसार उन्होंने इस मंदिर का निर्माण कराया। तभी से इस मंदिर का नाम पृथ्वीनाथ मंदिर पड़ा।
वास्तुकला का बेमिसाल नमूना, कजरी तीज को लेकर 4 किलोमीटर तक बैरिकेडिंग
श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होने के साथ ही पृथ्वीनाथ मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। मंदिर के पुजारी जगदंबा प्रसाद तिवारी ने बताया कि वैसे यहां तो प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। जबकि श्रावणमास और हर तीसरे साल पड़ने वाले अधिमास मे यहां लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। कजलीतीज के अवसर पर यहां की बेकाबू भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को करीब 3 से 4 किलोमीटर वेरीकेटिंग कराई गई थी। जलाभिषेक कुशल संपन्न हो गया है।
Published on:
18 Sept 2023 07:34 pm
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