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आचार्य पवन शास्त्री बताते हैं कि नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। मां कूष्मांडा सौरमंडर की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती है। देवी कूष्मांडा की कृपा से साधक को रोगों शोक और तमाम दोष से लड़ने की शक्ति मिलती है। शनिवार यानी कल नवरात्र का चौथा दिन है। इस दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाएगी।
मां कुष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहते हैं
मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके हाथों में धनुष, बाण, चक्र, गदा, अमृत कलश, कमल और कमंडल सुशोभित है। संसार की रचना से पहले जब चारों ओर घना अंधेरा छाया था। तब देवी के इस रूप से ब्रह्मांड का सृजन हुआ था।
पीले वस्त्र धारण कर पूजा में इन पीली सामग्री को करें शामिल
मां कूष्मांडा की पूजा में पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा के समय देवी को पीला चंदन लगाएं। कुमकुम, मौली, अक्षत चढ़ाएं। अब एक पान के पत्ते में थोड़ा सा केसर लें और ओम बृं बृहस्पते नमः मंत्र बोलते हुए देवी को अर्पित करें। अब ॐ कूष्माण्डायै नम: मंत्र का एक माला जाप करें। दुर्गा सप्तशती या फिर सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें।मां कूष्मांडा को पीला रंग अति प्रिय है। इस दिन देवी को पूजा में पीले रंग के वस्त्र, पीली चूड़ी, पीली मिठाई अर्पित करें। पीला फूल भी चढ़ाये। पीली मिठाई का भोग लगाएं।
इन मंत्रों का करें जाप
कुष्मांडा: ऐं ह्री देव्यै नम: ॐ कूष्माण्डायै नम:
वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥
Published on:
24 Mar 2023 05:35 pm
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