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चिट्ठियों से लेकर क्यू आर कोड तक का सफर, डाक विभाग मना रहा राष्ट्रीय सप्ताह दिवस जाने पिनकोड से संबंधित रोचक बातें

गोंडा भारतीय डाक विभाग का करीब डेढ़ सौ वर्षो का पुराना इतिहास रहा है। चिट्ठियों से लेकर के डिजिटल क्रांति के तहत क्यूआर कोड तक के सफर में डाक विभाग ने देश के सामाजिक आर्थिक विकास में अपनी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गोंडा बलरामपुर के 56 डाकघरों में राष्ट्रीय डाक सप्ताह मनाया जा रहा है।

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राष्ट्रीय डाक सप्ताह के तीसरे दिन मंगलवार को डाक विभाग फिलेटली दिवस के रूप में मना रहा है। प्रधान डाकघर में कार्यक्रम के तहत मंगलवार को क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रमुख डाक अधीक्षक गोंडा मंडल हिमांशु तिवारी ने बताया

कि विश्व डाक सप्ताह दिवस का उद्देश्य देश भर में लोगों के दैनिक जीवन, व्यापार और सामाजिक तथा आर्थिक विकास में डाक की भूमिका के बारे में जागरूकता कार्यक्रम चलाकर डाक विभाग में हुए डिजिटल क्रांति को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि विश्व-एक डाक प्रणाली' की अवधारणा को साकार करने हेतु 9 अक्टूबर, 1874 को 'यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन' की स्थापना बर्न, स्विटजरलैण्ड में की गई थी। जिससे विश्व भर में एक समान डाक व्यवस्था लागू हो सके। भारत प्रथम एशियाई राष्ट्र था, जो कि 1 जुलाई 1876 को इसका सदस्य बना। कालांतर में वर्ष 1969 में टोकियो, जापान में सम्पन्न यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन कांग्रेस में इस स्थापना दिवस को 'विश्व डाक दिवस' के रूप में मनाने के लिए घोषणा की गई थी।

डाक विभाग के कार्यक्रम पर एक नजर

9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस 10 अक्टूबर को वित्तीय सशक्तिकरण दिवस के अवसर पर गोंडा मंडल के प्रत्येक डाकघर में बीमा एवं बचत योजनाओं से संबंधित मेले का आयोजन किया गया। जिसमें काफी संख्या में लोगों ने प्रतिभाग किया उन्हें विस्तार से योजनाओं की जानकारी दी गई। तथा मेले में बहुत से लोगों के खाते खोले गए तथा बीमा भी किया गया। 11 अक्टूबर को फिलेटली दिवस में एवम प्रधान डाकघर में क्वीज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। 12 अक्टूबर को मेल एवम पार्सल दिवस के अवसर पर मंडल के बल्क बुकिंग कस्टमर से मीटिंग किया जायेगा। जिनके साथ पार्सल एवम अन्य व्यवसाय अधिक से अधिक बढ़ावा मिल सके। 13 अक्टूबर को अन्त्योदय दिवस मनाया जा रहा है। जिस पर डाकघर आधार केंद्रो पर आधार ड्राइव मनाया जा रहा है। इसके साथ ही ग्रामीण एवम शहरी क्षेत्र में पोस्टमैन जगह जगह कैंप और मेले के माध्यम से लोगो का आधार बनायेंगे।

क्या है पिन कोड प्रणाली

भारतीय डाक विभाग अपनी डाक सेवाओं में प्राथमिक घटक के रूप में एक पिन कोड का इस्तेमाल करता है। जो डाक सूचकांक संख्या के लिए यूज किया जाता है। इसकी शुरुआत कब और कैसे हुई यह जानना भी दिलचस्प है। दरअसल, भारतीय डाक विभाग की पिन प्रणाली केंद्रीय संचार मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव श्रीराम भीकाजी वेलणकर की देन है। उन्होंने 15 अगस्त 1972 को 6अंकीय पिन प्रणाली प्रस्तुत की थी। पिन का पहला अंक क्षेत्र को दर्शाता है, दूसरा अंक उप-क्षेत्र को दर्शाता है। और तीसरा अंक जिले को दर्शाता है। बाकी अंतिम तीन पिन अंक डाकघर के कोड को प्रदर्शित करते हैं। जिसके तहत संबंधित पत्र अपने पते पर पहुंच जाता है।