
प्रेम की निशानी सगरा तालाब के बीचों-बीच स्थित काल्पनिक वृंदावन का ही एक हिस्सा राधा कुंड है। तालाब से ही एक गुफा के जरिए राधा कुंड में पानी आता था। वर्तमान समय में वह रास्ता अब अतिक्रमण का शिकार हो गया है। राधा कुंड के बीचो बीच में सात कुएं स्थित है। जो वर्तमान में पूरी तरह से पटकर बराबर हो गए। एक समय था जब राधा कुंड में पानी कभी समाप्त नहीं होता था। काल्पनिक वृंदावन के साथ-साथ राधा कुंड का निर्माण राजा की गायों को पानी पीने के लिए कराया गया था। गऊ घाट भी आज मौजूद है।
राधा कुंड में राजा की गाये पीती थी पानी आज भी विद्यमान है गौ घाट
शहर के बीचोबीच स्थित राधाकुंड का इतिहास काल्पनिक वृंदावन से जुड़ा है। बताया जाता है कि गोण्डा नरेश अद्वैत सिंह भगवान कृष्ण के अनन्य भक्त थे। उन्हें वृंदावन बहुत सुहाता था। वह महीनों वृंदावन रहते और भगवान कृष्ण की भक्ति करते। रानी को यह चिंता हुई कि कहीं महाराज वृंदावन ही न रह जाए। इसके लिये रानी ने गोण्डा में ही वृंदावन बनाने का फैसला किया। रानी के निर्देश पर सगरा तालाब के बीचों बीच काल्पनिक गोवर्धन पर्वत बनवाया गया उसके ऊपर कृष्ण मंदिर बनवाया। राधा कुंड भी इसी काल्पनिक वृंदावन का एक हिस्सा है। जो सुरंग के जरिये सगरा तालाब से जुड़ती है। जल का मुख्य स्रोत सगरा तालाब ही था। जहाँ से राधा कुंड में सुरंग के जरिये पानी पहुंचता था। राधा कुंड में गोण्डा नरेश की गायें पानी पीती थी। जिसके लिए कुंड में गाय घाट का भी निर्माण कराया गया था। जिस ऐतहासिक राधा कुंड का विकास पर्यटन की दृष्टि से होना चाहिए था। वह आज स्वयं को ही जीवित रखने की जद्दोजहद कर रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस राधा कुंड को गौ सेवा के लिए विशेष रूप से बनवाया गया था। गायों के लिए गौ घाट का भी निर्माण कराया गया। लेकिन कुछ लोगों द्वारा इसकी भौगोलिक स्थिति बिगाड़ दी गयी। जिलाधिकारी डॉ उज्जवल कुमार के निर्देश पर राधा कुंड की साफ सफाई का काम नगर मजिस्ट्रेट अर्पित गुप्ता की अगुवाई में शुरू हो गया है। बताया जाता है इसके लिए वृहद कार्ययोजना भविष्य में बनाकर इसका सुंदरीकरण करने के साथ ही साथ ऐसे पुराने स्थित में बहाल किया जाएगा।
Published on:
15 Apr 2022 09:09 pm

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