
सांकेतिक फोटो,सांकेतिक फोटो
यूपी बोर्ड आफ टेक्निकल एजुकेशन (बीटीईयूपी) ने देवीपाटन मंडल के 15 फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता रद्द कर दी गई। वैसे पूरे प्रदेश में 427 कॉलेज की मान्यता रद्द की गई है। ऐसे लोग अब लाइफ टाइम फार्मेसी कॉलेज नहीं चला सकेंगे। तथ्यों को छुपाकर मान्यता लेना इन कॉलेज के प्रबंधकों को महंगा पड़ गया है।
स्वास्थ्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए यूपी बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन ने मानक विहीन फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता रद्द कर दी है। देवीपाटन मंडल के जिन 15 फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता रद्द की गई है उसमें कई दिग्गज नेताओं के कॉलेज शामिल हैं। टेक्निकल एजुकेशन ऑफ बोर्ड ने जांच के दौरान यह पाया कि इन कालेजों के प्रबंधकों द्वारा मान्यता लेते समय दिए गए घोषणापत्र में तत्वों की गलत जानकारी दे दिया। विभाग की जांच में फार्मेसी कॉलेज के लिए जो मानक होते हैं। उसे कोई भी कॉलेज पूरा नहीं कर पाया। फार्मेसी कॉलेजों के प्रबंधकों ने कागजों में सब कुछ ऑल इज वेल कर दिया। लेकिन वास्तविकता इसके भी बहुत विपरीत रही है। माना जा रहा है कि इन कॉलेजों की मान्यता रद्द होने से हजारों छात्रों के भविष्य संकट में पड़ सकते हैं। इन कॉलेजों द्वारा छात्रों से मोटी रकम लेकर उन्हें नर्सिंग कोर्स सहित विभिन्न तरह की डिग्रियां दी जा रही थी। पूरे प्रदेश में ऐसे 427 कॉलेज मिले हैं। जिनके मान्यता रद्द कर दी गई है। इन कॉलेजों के प्रबंधक अब लाइफ टाइम फार्मेसी कॉलेज नहीं चला सकेंगे। इन पर आरोप है कि इन लोगों ने एफिडेविट में गलत जानकारी देकर विभाग को गुमराह किया। जिससे इनकी मान्यता रद्द करने के साथ-साथ अब फार्मेसी कॉलेज चलाने के लिए एनओसी या संबद्धता नहीं ले पाएंगे। इनमें गोंडा के पांच, बहराइच के आठ और बलरामपुर के दो कालेज हैं। इनमें कुछ नेताओं के भी शामिल कॉलेज हैं।
जानिए एडी हेल्थ और सीएमओ ने क्या कहा
इस संबंध में अपर निदेशक स्वास्थ्य ने बताया कि यह चिकित्सा शिक्षा विभाग में आता है। हम लोगों का इससे कोई मतलब नहीं है। सीएमओ ने बताया कि मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। यह चिकित्सा शिक्षा विभाग में आता है।
Published on:
18 Jul 2023 06:01 pm
बड़ी खबरें
View Allगोंडा
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
