8 अप्रैल 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हिंदू-मुस्लिम राजनीति पर बृजभूषण शरण की बेटी शालिनी सिंह का बड़ा बयान, चुनाव लड़ने को लेकर बताया प्लान

शालिनी सिंह ने राजनीति में आने को लेकर अपना प्लान बताया है। हिंदू-मुस्लिम राजनीति पर उन्होंने कई सारे बातें की हैं।

2 min read
Google source verification

गोंडा

image

Anuj Singh

Apr 08, 2026

हिंदू-मुस्लिम पर खुलकर बोलीं शालिनी सिंह

हिंदू-मुस्लिम पर खुलकर बोलीं शालिनी सिंह Source- Official FB

UP Politics: भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह इन दिनों अपनी बेबाकी और सक्रियता के लिए चर्चा में हैं। वे लेखिका, कवयित्री और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। हाल ही में उनकी किताब 'बेबाक हूं, बेअदब नहीं' आई है। एक मीडिया चैनल से बातचीत में उन्होंने अपने विचार साफ-साफ रखे। वे राजनीति में कदम न रखने पर जोर दे रही हैं और सिर्फ काम करने की बात कर रही हैं।

राजनीति और परिवार का रिश्ता

शालिनी सिंह कहती हैं कि वे सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने राजनीति की ओर कोई कदम नहीं बढ़ाया है। परिवार में राजनीति है, लेकिन यह उनका दोष नहीं है। आज जो चर्चाएं हो रही हैं, वे खुद नहीं शुरू कीं। वे स्पष्ट रूप से कहती हैं कि नेतृत्व कौन करेगा… यह जनता तय करेगी। चुनाव लड़ना या नहीं लड़ना, यह नियति और कर्म तय करेंगे। कुछ चुनिंदा लोग काम करने आए हैं, उन्हें काम करने दीजिए। मनोबल मत तोड़िए। वे जोर देकर कहती हैं कि हम टिकट नहीं मांग रहे। मांगने वालों में हम शामिल भी नहीं हैं। सिर्फ काम करना चाहते हैं। अगर राजनीति उनके काम में बाधा बनेगी, तो वे ऐसी कोई बड़ी चीज नहीं छोड़ सकतीं जिसे वे छोड़ न सकें।

शिक्षा और बुनियादी मुद्दों पर फोकस

शालिनी सिंह खुद को एजुकेशनिस्ट बताती हैं। वे शिक्षण संस्थान चलाती हैं और मूलभूत चीजों पर काम करती हैं। उनके अनुसार, आसपास की हवा साफ हो, शिक्षा का अधिकार हर व्यक्ति तक पहुंचे और अच्छी क्वालिटी की शिक्षा सभी को मिले। वे कहती हैं कि बिजली, पानी और सड़क जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। बड़े-बड़े इश्यू उठाने से पहले अपने आसपास की समस्याओं को ठीक करना जरूरी है। हम प्राधिकरण से लड़ने की बजाय उन्हें सक्षम क्यों न बनाएं? पहले वाले मुद्दों पर बात करें, ताकि असल काम हो सके। वे मानती हैं कि शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों पर काम करने से सारी चीजें अपने आप सुधर जाती हैं।

हिंदू-मुस्लिम राजनीति और भाईचारा

हिंदू-मुस्लिम राजनीति पर शालिनी सिंह साफ कहती हैं कि इस देश को इससे ऊपर उठना होगा। हमें वसुधैव कुटुंबकम सिखाया गया है। पूरा जहान ही हमारा परिवार है। अतिथि देवो भव जैसी मानसिकता हमारी है। वे याद दिलाती हैं कि पहले जाति-पाति की इतनी बात नहीं होती थी। उनके यहां सहभोज होता था। किसी के घर से दाल आती, किसी के यहां से सब्जी। सब मिलकर परोसते थे। अब पता नहीं चलता कि किसने किसका नमक खाया। वे जोर देती हैं कि हमें भाईचारे की बात करनी चाहिए। बंटवारे की राजनीति से देश को नुकसान होता है।

नागरिक के रूप में दायित्व

शालिनी सिंह कहती हैं कि सबसे पहले अपने दायित्व की बात करें। एक सिटीजन के तौर पर हमारा क्या कर्तव्य है? हमारे जनप्रतिनिधि को हम कैसे मजबूत बना सकते हैं? वे पूछती हैं कि हम आलोचना ही क्यों करें? उनके अच्छे कामों की सराहना भी होनी चाहिए। अगर गलती हो तो एक साथ खड़े होकर उसकी आलोचना करें। सिर्फ नकारात्मक बातें नहीं, सकारात्मक योगदान भी जरूरी है।

खुद फैसले लेती हैं शालिनी

शालिनी सिंह की जिंदगी में हमेशा खुद फैसले लेने पड़े। वे 'बेबाक' शब्द पर कुछ लिखना चाहती थीं, और किताब का टॉपिक अपने आप आ गया। वे कहती हैं कि बेबाकी बहुत जरूरी है। डर के जीने से कोई फायदा नहीं। श्मशानों में उनकी लाशें जल रही हैं, जो इस डर से नहीं लड़े कि मर जाएंगे। तब सच्चाई ही मौत है। इसलिए बेबाक होकर जीना चाहिए। डर से कुछ हासिल नहीं होता। सच्चाई और हिम्मत से ही आगे बढ़ा जा सकता है।