
घाघरा नदी मे कटान जारी है। दो गाँव पूरी तरह से नदी के जद में आ गए हैं। कटान के कारण अब तक 15 घर नदी में समा गए हैं। इन दो गाँव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। पीड़ित अपने पक्के मकानों को स्वयं तोड़ कर कर सरिया ईट निकालकर सुरक्षित स्थानों पर रख रहे हैं।
घाघरा नदी में आए उफान के बाद जलस्तर घटने से कटान तेज हो गई है। जिले के दो तहसील कर्नलगंज व तरबगंज के गाँव प्रभावित होते है। घाघरा नदी का चारों तरफ कटान जारी है। कटान के चलते तबाही मच गई। नदी से सटे 13 गांवों के कई घर पानी में समा गए। स्थिति इतनी गंभीर है कि यहां के बाबू पुरवा मजरे का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है। ऐली परसोली के प्रधान मनीराम यादव ने बताया कि बाबूपुरवा में अब तक मनोज,शिवकुमार,रामजीत,रामलाल,विजयपाल, ओमप्रकाश,लालबाबू,संतोष,अंजनी कुमार,केवला देवी,अनिल कुमार,मायावती,संजय के घर नदी में समा चुके हैं। इसके साथ ही राजेंद्र,रामानंद,राधे, अनिल जोखू,झम्मन,दद्दू,रामजीत,सुनील,छोटू, संजीत,राम अवध,बैद्यनाथ,जुगरा,रामबहादुर का घर कटान की जद में आ चुका है। जो दो एक दिन में घाघरा में समा जाने की पूरी आशंका है।
सरयू नदी भी उफान पर आसपास के ग्रामीण सहमें
सरयू नदी (घाघरा नदी) में उफान से आसपास गांव के लोगों की बेचैनी बढ़ने लगी है। लोग पूरी रात्रि जगकर नदी की स्थित की जानकारी करते रहते है। वही जल का फैलाव होने से कई गांव के मार्ग पर पानी भर गया है।
नेपाल से छोड़े जा रहे पानी से कभी घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ जा रहा है तो कभी जलस्तर कम होने से नदी की जबरदस्त कटान शुरू हो जाती है। नदी का पानी खेती योग्य जमीन और घरों को काटता हुआ अन्य गांवों की ओर बढ़ रहा है। जिससे अभी कई और मकान कटान के मुहाने पर हैं। इससे यहां के लोगों में हड़कंप मचने के साथ ही पलायन और तेज हो गया है। कटान को देखते हुए कुछ लोग मकान पहले ही खाली कर चुके थे। जिनका मकान कट चुका है वह या तो बांध पर रहने लगा है या अपने रिश्तेदार के यहां शरण ले लिए है। अंजनी राजेश ने बताया कि उनका पक्का मकान कटान के जद में है इसलिये स्वयं तोड़ कर सरिया ईंट सुरक्षित कर रहे है।
Published on:
06 Sept 2022 07:25 pm
बड़ी खबरें
View Allगोंडा
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
