
जनपद को 98 हजार मिट्टी टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य मिला था। इसके लिए 116 क्रय केंद्र खोले गए थे। करीब दो दर्जन गेहूं क्रय केंद्र ऐसे हैं जिनकी डेढ़ माह बाद बोहनी तक नहीं हुई। इन क्रय केंद्रों के माध्यम से निर्धारित गेहूं समर्थन मूल्य 2015 रुपए प्रति कुंतल की दर से किसानों का गेहूं खरीदा जाना था। लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है जब बाजार मूल्य अधिक है। वर्तमान समय में मंडी में करीब 22 सौ प्रति कुंतल गेहूं बिक रहा है। अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए लगभग किसान अपना गेहूं बाजार भाव पर बेच चुके हैं। सच्चाई यह है कि अब किसानों के पास गेहूं बचा ही नहीं है। लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रशासन द्वारा गेहूं खरीद के लिए मोबाइल टीमों की व्यवस्था बनाई गई थी। जो गांव गांव जाकर सार्वजनिक स्थानों पर कैंप लगाकर इ गेहूं की खरीद करना था। इसके लिए यह आवश्यक है कि जिस गांव में एक ट्रक गेहूं मिल जाएगा क्रय एजेंसियों वहीं पर किसानों का गेहूं खरीद लेंगी। लेकिन क्रय केंद्र प्रभारियों को किसी गांव में एक ट्रक गेहूं अब ढूंढे नहीं मिल रहा है।
किन क्रय एजेंसियों ने कितनी की खरीद
98 हजार मीट्रिक टन के सापेक्ष अभी 1527 मीट्रिक टन गेहूं खरीद हो सकी है। इनमें खाद्य विभाग 192.20 एमटी, पीसीएफ ने 319.41 एमटी, पीसीयू ने 715.61 एमटी,यूपी एसएस 252.85 एमटी तथा भारतीय खाद्य निगम ने 47.70 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद किया है। इस संबंध में डिप्टी आरएमओ प्रज्ञा मिश्रा ने बताया कि जनपद के 398 किसानों से गेहूं की खरीद की गई है।
जिनका 307.85 लाख रुपये शासन की ओर से भुगतान करना था। इसके सापेक्ष 237.31 लाख रुपये का भुगतान हो चुका है। बाकी भुगतान त्वरित कर दिया जाएगा। क्रय केंद्रों पर किसान के न पहुंचने की वजह से किसानों के भुगतान में प्रशासन तत्परता दिखा रहा है। किसानों के खाते में 72 घंटे में पैसा किसानों के खाते में पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि गेहूं खरीद का प्रयास किया जा रहा है। क्रय केंद्र प्रभारी किसानों से संपर्क कर रहे हैं। सचल टीमें गांव-गांव जाकर गेहूं बेचने के लिए किसानों को प्रेरित कर रही हैं, लेकिन बाजार भाव अधिक होने के कारण खरीद में तेजी नहीं आ रही है। खरीद में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है।
Published on:
15 May 2022 03:57 pm
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