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शादी बंधन में बंधे 101 जोड़े, पंडित और मौलवियों ने कराई रस्म अदायगी

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 93 हिंदू जोड़ों और 8 मुस्लिम जोड़ों की हुई शादी

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chhindwara

बेटियों की शादी के लिए 337 गरीबों को नहीं मिल सकेगा योजना का लाभ

गोरखपुर। सरकार की योजना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बृहस्पतिवार को गोरखपुर में 101 जोड़े विवाह बंधन में बंध गए। 93 जोड़ों का सनातन धर्म के वैवाहिक संस्कारों के तहत शादी कराया गया तो 8 जोड़ों का इस्लाम की शरीयत के हिसाब से निकाह पढ़ाया गया। इन जोड़ों को आशीर्वाद देने के लिए प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह से लगायत सांसद-विधायक और पूरा सरकारी अमला मौजूद रहा।
विवाह बंधन में बंधे जोड़ों को सरकारी की ओर से बर्तन, कपड़े, मोबाइल, पायल, बिछिया आदि शामिल है उपहार स्वरूप भेंट किया गया।
हिंदू रीति-रीवाज से पंडित माधव शरण त्रिपाठी व राजेश त्रिपाठी ने विवाह संपन्न कराया तो मुस्लिम जोड़ों को मुफ्ती वलीउल्लाह व अख्तर हुसैन ने निकाह कराया।
शहनाई वादक मोहम्मद उस्मान व उनके साथियों की सुमधुर शहनाई माहौल को खुशनुमा बना रही थी।
प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह ने सभी जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए सुखद जीवन की कामना की। मंत्री धर्मपाल सिंह के साथ एकएक जोड़ों के पास आशीर्वाद देने महापौर सीताराम जायसवाल, विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल, विधायक महेन्द्रपाल सिंह, विधायक संगीता यादव, विधायक विपिन सिंह, विधायक संत प्रसाद, विधायक फतेह बहादुर सिंह भी पहुंचे थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों का सामूहिक विवाह मुख्यमंत्री की सबसे महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना के तहत गरीब बेटियों की शादी का बोझ गरीब पर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की इस योजना ने गरीबों को राहत दी है।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी के. विजयेन्द्र पाण्डियन, सीडीओ अनुज सिंह, जनार्दन तिवारी, एडीएम प्रशासन प्रभुनाथ, सिटी मजिस्ट्रेट विवेक श्रीवास्तव, मीनू सिंह, रेखा गाडिया, संजय सिंह, समरजीत सिंह एवं खण्ड विकास अधिकारी उपस्थित रह कर सक्रिय सहयोग प्रदान किया। संचालन समाज कल्याण अधिकारी सप्तऋषि कुमार ने किया।
आयोजन स्थल पर ही विवाह पंजीकरण के लिए ब्लाॅकवार टेबल लगाई गई थी। जहां विवाह के बाद दम्पत्ति उपस्थित हुए। बायोमेट्रिक पहचान कर उनकी शादियों को पंजीकृत कर वहीं पर उन्हें प्रमाण-पत्र भी दे दिया गया।

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