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गोरखपुर में 233 प्रसूताओं की मौतों में 201 की आडिट में आया यह सच आपको विचलित कर देगा

गर्भवती महिलाओं के लिए तमाम योजनाएं लेकिन मौतों के ये आंकड़े
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गोरखपुर

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Dheerendra Vikramadittya

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Updated: 3 May 2018, 3:28 PM IST

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गोरखपुर। गर्भवती महिलाओं के लिए सरकार तमाम योजनाएं चला रही हैं। प्रचार-प्रसार के नाम पर करोड़ों पानी की तरह बहा दिए जा रहे हैं लेकिन चिकित्सीय देखभाल के अभाव में गर्भवती महिलाओं की जान जाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सबसे विद्रुप यह कि प्रसूताओं को चिकित्सीय सुविधा समय से नहीं उपलब्ध हो पा रहा। आलम यह कि प्रसव के दौरान विभिन्न चिकित्सीय विसंगतियों से उनकी जान चली जा रही है।
प्रसव के दौरान प्रसूताओं की मौतों की आडिट में यह तथ्य सामने आए हैं। आंकड़ों पर अगर गौर करें तो गोरखपुर में 233 प्रसूताओं की मौतें आॅन रिकार्ड दर्ज है। इन 233 मौतों में 201 मौतों की आडिट में जो तथ्य सामने आएं वह चौकाने वाले हैं। वह यह कि इन मौतों में 56 प्रसूताओं की मौतें ब्रेन हेमरेज से हुई थी। जबकि 38 प्रसूताओं की जानें इंफेक्शन की वजह से चली गई। 20 महिलाओं की मौत गर्भ के दौरान हाईपर टेंशन की वजह से होने की बात कही गई है। सबसे विद्रुप यह कि 46 प्रसूताओं की मौत तो सीधेे-सीधे लापरवाही से हुई है। 46 प्रसूताओं की मौत सिर्फ इसलिए हो गई क्योंकि उनके प्रसव कराने में देरी हुई।
मौतों के यह आंकड़े उस क्षेत्र के हैं जहां गांव-गांव एएनएम और आशा बहू कार्यकत्र्रियां तैनात हैं। उनका काम ही ऐसी महिलाओं की देखभाल और आवश्यक चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराना हैं। ये लोग सरकारी चिकित्सालयों और गर्भवती के बीच समन्वय बनाए रखते हैं और सुरक्षित प्रसव के लिए जिम्मेदारी निभाते हैं। लेकिन इतनी व्यवस्था होने के बावजूद प्रसव के दौरान महिलाओं की होे रही मौतें पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह ही खड़ा करता है।

चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि अगर समय समय पर प्रसूताआें की देखभाल केवल हो जाती तो शायद बहुत सी जानें बचार्इ जा सकती थी। प्रसव काल या उस दौरान बेहद संजीदगी से चिकित्सीय देखभाल की जरूरत होती है। समय-समय पर कर्इ जांचें भी आवश्यक होती है। इसमें जरा सी भी लापरवाही जान पर आ जाती है।
हालांकि, आॅडिट रिपोर्ट देखने के बाद डीएम विजयेंद्र पांडियान ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए यह निर्देश दिया है कि प्रसव के दौरान 9 माह तक गर्भवती स्त्री ए.एन.एम/आशा के देखभाल में रहती है। इन सब कारणो से मृत्यु नही होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों को यह भी निर्देशित किया है कि गांव में तैनात स्वास्थ्यकर्मी जो काम नहीं कर पा रहे हैं उनकी जगह पर दूसरों को रखा जाए।