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गोरखपुर। लोकसभा उपचुनाव में हार के बाद अब भारतीय जनता पार्टी गोरखपुर में निषाद वोटरों को अपने पाले में करने में जुटी हुई है। निषाद वोटरों को खुश करने के लिए सपा की झोली से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को झटक कर इस बिरादरी को सौंपने का मास्टर स्ट्रोक खेलने में लगी हुई है। हालांकि, सपा भी किसी भी सूरत में जिला पंचायत अध्यक्ष गीताजंलि यादव को पद से बेदखल नहीं होने देना चाहती।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ में उपचुनाव में बीजेपी को जबर्दस्त झटका लगा है। तीन दशक से जो सीट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास थी उसे बीजेपी उपचुनाव में खो चुकी है। यही नहीं इस सीट को जीतने के लिए विपक्ष की रणनीति इस कदर रंग लाई कि इसे प्रदेशव्यापी कर सत्ताधारी दल की नींद उड़ा दी है।
गोरखपुर जिला निषाद बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। गोरखनाथ मंदिर की वजह से निषाद समाज का अधिकतर वोट मंदिर के प्रत्याशी को मिलता रहा है। हालांकि, कुछ सालों पहले हुए तमाम राजनैतिक परिवर्तन के बाद निषाद समाज के नेता रूप में जमुना निषाद उभरे और उन्होंने मंदिर के खिलाफ समाजवादी पार्टी से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन उनको जीत हासिल नहीं हो सकी। हालांकि, जीत-हार का अंदर बेहद कम हो गया था। पर इस चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ पर ही निषाद समाज ने भरोसा जताया। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरखपुर संसदीय सीट पर उपचुनाव हुए। इस सीट को जीतने के लिए समाजवादी पार्टी ने मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए निषाद पार्टी के अध्यक्ष डाॅ.संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद को अपना प्रत्याशी बना दिया। इस संयुक्त प्रत्याशी को बसपा का भी समर्थन मिल गया। विपक्ष की रणनीति सफल हुई। सपा का यादव-मुस्लिम, निषाद पार्टी का निषाद और बसपा का दलित वोटर एकसाथ आया तो अप्रत्याशित परिणाम आए। सत्ताधारी दल बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। इस हार की गूंज दूर तलक सुनाई दी। विपक्ष का भी आत्मविश्वास बढ़ा और इस गठबंधन को आगे बढ़ाने का फैसला किया गया। विपक्ष के इस निर्णय ने बीजेपी का चैन छीन लिया है। इसका परिणाम यह कि बीजेपी यूपी में लगातार दलितो को अपने पक्ष में करने के लिए मुहिम चला रही। ग्राम स्वराज योजना से लेकर सामाजिक न्याय दिवस तक इसी रणनीति का हिस्सा है।
चूंकि, बीजेपी को अहसास है कि बिना निषाद समाज के समर्थन के गोरखपुर में जीत मुश्किल हो सकती है इसलिए वह लगातार इस समाज को अपने पक्ष में करने में जुटी हुई है। इस बार वह जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी इस समाज को सौंपने की तैयारी में है।
बीजेपी सूत्रों की मानें तो संगठन के एक सीनियर पदाधिकारी के साथ एक माननीय इसके सूत्रधार हैं। यह माननीय जिला पंचायत सदस्यों से संपर्क करके अविश्वास के लिए तैयार कर रहे हैं। हालांकि, समाजवादी पार्टी को भी इस बात की भनक लग चुकी है। वह भी बीजेपी के हर वार का काट खोजने में लग चुकी है।
Published on:
15 Apr 2018 01:45 pm
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