गोरखपुर. जब पूरे देश के नौजवानों को एक बुजुर्ग क्रांति के लिए तैयार कर रहा था तो गोरखपुर भी इस सम्पूर्ण क्रांति में कदमताल कर ही रहा था। यह वह दौर था जब साथ ही साथ यहाँ शनै शनै माफियाराज भी पांव पसार रहा था। कहते हैं अपराध की दुनिया को कायम रखने के लिए युवा शक्ति की जरुरत होती है और गोरखपुर विवि से बड़ा युवा शक्ति का कौन सा केंद्र हो सकता। बस यहीं से छात्र संघ चुनाव में एक नए तरह की राजनीति ने पदार्पण किया। यह राजनीति थी बाहुबल की, वर्चस्व की। जिसको पूर्वांचल का दो सबसे बड़ा ध्रुव सीधे तौर पर अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर लड़ना शुरू किया।