
दिलदारनगर-ताड़ीघाट पैसेंजर
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
गाजीपुर. बिहार से सटे गाजीपुर जिले के ताड़ीघााट के लोगों के लिये यह ऐतिहासिक दिन था। ताड़ीघाट पर आवागमन का एकमात्र सहारा दिलदारनगर ताड़ीघाट पैसेंजर 11 महीने बाद एक बार फिर शुरू हुई। लेकिन इस बार ट्रेन की रवानगी ऐतिहासिक रही। 1880 में रेलवे लाइन बनने के पूरे 144 साल बाद दिलदारनगर ताड़ीघाट पर पैसेंजर ट्रेन इलेक्ट्रिक इंजन लेकर रवाना हुई। ताड़ीघाट के लोगों ने अपने क्षेत्र में पहली बार इलेक्ट्रिक इंजन देखा। ताड़ीघाट पैसेंजर बीते साल 22 मार्च से बंद चल रही थी।
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल अंतर्गत दिलदारनगर-ताड़ीघाट रेलवे रूट मेन लाइन से जुड़ा होने के बावजूद यहां अब तक डीजल इंजन से ही ट्रेनों का परिचालन होता था। इस रूट पर महज एक ट्रेन दिलदारनगर ताड़ीघाट पैसेंजर कई फेरों में चलती है। तत्कालीन रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा की कोशिशों से 19 किलोमीटर लंबे इस रूट का विधुतीकरण शुरू हुआ। यहां दोहरीकरण और विधुतीकरण का काम पूरा हो जाने के बाद 14 अगस्त को ही रेल संरक्षा आयुक्त पूर्वी परिमंडल एएम चौधरी ने निरीक्षण कर बिजली इंजन से ट्रेन चलाने को हरी झंडी दे दी थी। पर कोरोना संक्रमण और लाॅक डाउन के चलते इसकी शुरुआत नहीं हो सकी। अब धीरे-रेल परिचालन बहाल होने के क्रम में इसे भी शुरु किया गया।
सिर्फ 19 किलोमीटर लंबा है रूट
1880 में अंग्रेजी हुकूमत ने माल ढुलाई के मकसद से मेन लाइन के दिलदारनगर से गंगा किनारे ताड़ीघाट तक 19 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बिछवाई थी। बाद में इस रूट पर सिर्फ एक पैसेंजर ट्रेन लोगों के आवागमन के लिये चलती थी, जिसे भाप का इंजन खींचता था। बाद में 1990 में जब इसे छोटी लाइन से बड़ी लाइन में बदला गया तो भाप के इंजन की जगह डीजल इंजन ने ले ली। इसके पूरे 30 साल बाद अब यहां इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनों का परिचालन शुरू हुआ है।
बनेगा वैकल्पिक मार्ग
गाजीपुर में गंगा पर बन रहे रेल कम रोड ब्रिज के पूरा होते ही केवल ताड़ीघाट तक सीमित यह रेल रूट गाजीपुर होते हुए मऊ से गुजरे रेल रूट से जुड़ जाएगा। इसके पूरा होते ही पूर्वांचल से हावड़ा और बिहार की ओर ट्रेनों आवागमन का यह एक वैकल्पिक रूट बन जाएगा।
By Alok Tripathi
Published on:
02 Feb 2021 07:35 pm
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