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सत्ता में पैठ रखने वाले इस लीकर किंग का भी नाम आया था यूपी की चीनी मिलों की नीलामी में

चीनी के कटोरा कहे जाने वाले क्षेत्र के चीनी मिलों को बेचने में प्रशासनिक अफसरों ने भी की थी खूब मदद
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गोरखपुर

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Dheerendra Vikramadittya

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Updated: 7 May 2018, 3:01 PM IST

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रामकोला चीनी मिल

गोरखपुर। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के शासनकाल में औने-पौने दाम पर बेची गई 21 चीनी मिलों की नीलामी में सत्ता-नौकरशाह और माफिया के गठजोड़ की अहम भूमिका रही। सत्ता के बल पर कुछ खद्दरधारियों ने अपने तंत्र का बेजा इस्तेमाल किया तो नौकरशाही भी सुगर लाॅबी के साथ मिलकर खूब खेल करती गई। आलम यह कि चीनी मिलों की चल-अचल संपत्तियों की कीमत से काफी कम कीमत पर सौदा कर गन्ना क्षेत्र को बर्बाद करने की कहानी लिख दी गई। कहा तो यह भी जाता है कि शराब व्यवसाय में एकछत्र राज के लिए अचानक से चर्चित हुए पोंटी चड्ढा का भी इस खरीद-बिक्री में नाम आया था। कहा यह भी गया था कि कहानी का एक सिरा सहारनपुर से जुड़ा हुआ था। तत्कालीन बसपा सरकार के एक कद्दावर मंत्री खुद इस नीलामी में रूचि दिखा रहे थे और अधिकारियों को निर्देशित कर रहे थे।

यूपी की इन 21 चीनी मिलों में चीनी के कटोरा क्षेत्र की भी पांच मिलें

उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड अधीन 21 चीनी मिलों जिसमें 10 चालू व 11 बंद की बिक्री वर्ष 2010-11 में की गई थी। इसमें देवरिया की एक, कुशीनगर की तीन लक्ष्मीगंज-खड्डा-रामकोला, महराजगंज की एक सहारनपुर की भी पांच चीनी मिलें बेची गई थी।
इन चीनी मिलों को खरीदने के लिए कई कंपनियों पर गलत तरीके से अपनी बैलेंसशीट तक प्रस्तुत करने का आरोप भी है।
सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार शासन के रसूख का इन चीनी मिलों की बिक्री में भरपूर इस्तेमाल किया गया था। आलम यह कि चीनी मिलों को उसकी असली कीमत के दसवें और पंद्रहवें हिस्से की कीमत लगा दी गई थी। आलम यह कि कई चीनी मिलों में मौजूद चीनी और शीरे की कीमत भी चीनी मिलों की आंकी व बेची गई कीमत से अधिक थी। एक जानकार बताते हैं कि चल-अचल संपत्तियों की कीमत जो लगाई गई थी वह सत्ता के रसूख वालों के कहने पर लगी थी।
सीएजी रिपोर्ट के अनुासर चीनी मिलों की भूमि के अलावा संयंत्र, मशीनरी, फैक्ट्री के भवनों, चीनी गोदामों के साथ रिहायशी आवासों और अन्य अचल संपत्तियों के मूल्यांकन में मनमानी की गई। वैल्यवेशन में बिना किसी वजह से 25 प्रतिशत की छूट दे दी गई। एक जानकार बताते हैं कि सर्किल रेट को अनदेखा करने के कारण स्टांप ड्यूटी में कई सौ करोड़ की क्षति पहुंचाई गई।

चालू हालत में थी सिसवा और खड्डा की चीनी मिल
चीनी मिलों को बेचने में मानकों का जमकर उल्लंघन किया गया था। कुशीनगर के खड्डा व महराजगंज की सिसवा चीनी मिल समेत सहारनपुर आदि कई चीनी मिलें जो चल रही थी उनको भी बेच दिया गया। बताया यह जाता है कि बिकने के पूर्व वाले पेराई सत्र में यह चीनी मिलें फायदे में थी।

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