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लग्जरी लाईफ के लिए चर्चित है यह नेता, पुलिस को धता बता किया कोर्ट में सरेंडर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर हुई थी कार्रवाई, पुलिस कर रही थी तलाश

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pawan singh

गोरखपुर। आखिरकार एक बार फिर पुलिस ताकती ही रह गई और उसे जिसको शिद्दत से तलाश थी वह बड़ेे आराम से कोर्ट में सरेंडर कर लिया। हद तो यह कि इस हिस्ट्रीशीटर के खिलाफ कार्रवाई के लिए स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए थे। पुलिस को धता बताकर कोर्ट में सरेंडर करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। अभी कुछ दिन पहले ही माफिया विनोद उपाध्याय ने भी पुलिसिया सक्रियता के सामने ही संतकबीनगर कोर्ट में सरेंडर कर लिया था और गोरखपुर पुलिस को कई दिनों बाद इसकी भनक लगी।
खुद को भाजपा का नेता बताने वाले और तमाम कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंचों पर दिखने वालो चर्चित नेता पवन सिंह अपने तीन साथियों के साथ कोर्ट में शनिवार को सरेंडर कर लिया। शहर में बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स व अखबारों में कई-कई पेज विज्ञापन देने वाले इस पोस्टर नेता के दुर्दिन उस वक्त शुरू हुए जब रंगदारी के एक मामले में कुछ साल पहले तत्कालीन एसएसपी प्रदीप कुमार ने कार्रवाई की थी। लेकिन एसएसपी के ट्रांसफर के बाद पवन सिंह एक बार फिर सक्रिय हो गया था। भाजपा सरकार बनते ही उसकी सक्रियता काफी बढ़ गई थी। गोरखनाथ क्षेत्र के रहने वाले इस हिस्ट्रीशीटर को तमाम बार तत्कालीन सांसद व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मंच पर भी देखा गया। लेकिन जमीन के एक मामले में हेराफेरी कर करोड़ों डकारने का एक मामला जैसे ही कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार तक पहुंचा इसके दुर्दिन फिर शुरू हो गए।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ छापामारी की और गिरफ्तार कर लिया। लेकिन जमानत पर छूटने के बाद यह पवन सिंह फिर से फरार हो गया था। पुलिस इसके बाद उसे काफी तन्मयता के साथ तलाश रही थी।
शनिवार को उसने पुलिस की सक्रियता को आईना दिखाते हुए कोर्ट में सरेंडर कर लिया। पवन सिंह ने अपने भाई अमित सिंह, राजेश दुबे व मोहम्मद ताहिर के साथ गंैगेस्टर कोर्ट में न्यायाधीश मनोज सिंह के समक्ष सरेंडर किया। इसके बाद न्यायालय ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।

छापामारी में हथियारों व लग्जरी गाड़ियों का जखीरा मिला था

गोरखनाथ थानाक्षेत्र के नाथमलपुर का रहने वाला पवन सिंह शहर का एक चर्चित शख्स है। इस व्यक्ति पर आरोप है कि वह और उसके भाई अमित उर्फ मोनू ने खोराबार क्षेत्र के रहने वाले करीब 35 लोगों से करीब डेढ़ करोड़ रुपये हड़पे हैं। मामला 2014 का है। पीड़ित सच्चिदानंद सिंह की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज किया था। पीड़ित पक्ष के अनुसार सहजनवा के गीडा क्षेत्र में एक कॉलोनी विकसित करने के लिए पवन सिंह ने कुछ लोगों संग करार किया। करीब 35 लोग इस प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए जुड़े और करीब डेढ़ करोड़ की रकम आरोपियों के खाते में जमा की गई। लेकिन पीड़ित पक्ष का आरोप है कि प्रोजेक्ट पर काम करने के बजाय उसने धोखाधड़ी शुरू कर दी। फर्जी तरीके से जमीन अपने नाम करा ली और धीरे से उस जमीन की प्लाटिंग करा दी। फिर देखते ही देखते इन जमीनों को बेचना शुरू कर दिया। पीड़ित पक्ष ने बताया कि जब वह लोग आपत्ति करते तो वह बहाने बनाता तो कभी धमकाता। बारबार कहने के बाद भी न तो जमीन में हिस्सा ही दे रहा न उन लोगों के पैसे ही लौटा रहा। इसके बाद पीड़ित ने मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई। मामला हाईलेवल तक पहुंचने के बाद कार्रवाई में तेजी आई।
एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज के निर्देश पर सीओ प्रवीण सिंह ने पवन सिंह के घर पर छापामारी की थी। छापेमारी में दो अवैध वाकीटाकी, दो अवैध 315 बोर का राइफल, 12 बोर का एक बंदूक, 32 बोर का एक देशी कट्टा, दो बिना रजिस्ट्रेशन की फार्च्यूनर और एक बिना रजिस्ट्रेशन की होंडा सिटी कार कब्जे में लिया था। इन सामानों के मिलने पर उसके खिलाफ केस भी दर्ज किया गया था।

शाही जीवन शैली से पहली बार चर्चा में आया था पवन

पवन सिंह गोरखनाथ क्षेत्र का रहने वाला है। पहली बार उसका नाम एक छात्र नेता के रूप में सबके सामने आया लेकिन कुछ ही दिनों में उसकी लक्जरी लाइफ। एक से एक महंगी गाड़ियों का शौक सबको आकर्षित करने लगा। उसके आय का स्रोत क्या है यह तो स्पष्ट नहीं है लेकिन फेसबुक पर उसके फोटोज देख उसके शाही जीवन शैली को समझा जा सकता है। चुनाव के दौरान अपने क्षेत्र के अलावा कई जिलों में उसके पोस्टर और प्रचार भी उसका लोगों तक अपनी पहचान बनाने का एक तरीका रहा। अभी योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने पर अखबारों से लेकर शहर के विभिन्न हिस्सों में उसके बड़े बड़े होर्डिंग लगे थे। यही नहीं कई मामलों में उसपर केस भी दर्ज है। क्षेत्र में हुए एक दोहरे हत्याकांड में भी पवन सिंह का नाम आया था। कई पुलिस अधिकारियों से उलझने का भी मामला उसपर है। पुलिस ने भू माफिया के रूप में उसके खिलाफ पंजीकृत अभियोग व बरामद अवैध सामानों के मामले में एफआईआर दर्ज कर जेल भेज दिया था। लेकिन बाद में वह छूट गया था। इस बार उसने कोर्ट में सरेंडर कर लिया।