4 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

CM योगी के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद को इस मामले में प्रयागराज हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, जानिए क्या था मामला

सुनवाई के बाद कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित कर लिया था। बुधवार को पारित निर्णय में कोर्ट ने लोक अभियोजक के फैसले को विधि सम्मत माना और कहा कि मजिस्ट्रेट का आदेश तथ्य व कानून के विपरीत होने के कारण अवैध है।

2 min read
Google source verification
CM योगी के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद को इस मामले में प्रयागराज हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, जानिए क्या था मामला

CM योगी के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद को इस मामले में प्रयागराज हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, जानिए क्या था मामला

गोरखपुर। प्रयागराज हाईकोर्ट ने कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद पर गोरखपुर में रेलवे ट्रैक जाम करने के आरोप में चल रहे आपराधिक मुकदमे को वापस लेने की सरकार की अर्जी स्वीकार कर ली है। साथ ही साक्ष्य के विपरीत गलत अवधारणा पर केस वापस लेने की अर्जी खारिज करने का सीजेएम गोरखपुर का आदेश रद्द कर दिया है।यह आदेश न्यायमूर्ति राजबीर सिंह ने राज्य सरकार की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका व संजय निषाद की धारा 482 की याचिका को मंजूर करते हुए दिया है। याचिका पर शासकीय अधिवक्ता आशुतोष कुमार संड व एडवोकेट विनीत पांडेय ने बहस की।

7 जून 2015 को किए थे रेलवे ट्रैक पर विरोध प्रदर्शन

याचिका के अनुसार आठ जून 2015 को आरपीएफ थाना गोरखपुर में दर्ज मामले में आरोप लगाया गया है कि निषाद एकता परिषद के अध्यक्ष संजय निषाद ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ 7 जून 2015 को रेलवे ट्रैक पर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे नाघर-सहजनवा रेल ट्रैक का यातायात प्रभावित हुआ। सरकार ने सात अगस्त 2023 को केस वापस लेने का फैसला लिया। उसके बाद लोक अभियोजक ने सीआरपीसी की धारा 321 के तहत केस वापसी की अर्जी दी। सीजेएम ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि हाईकोर्ट से इसकी अनुमति नहीं ली गई है और केस पर अंतिम बहस होनी है।

CJM गोरखपुर का आदेश रद्द किया

शासकीय अधिवक्ता एके संड ने कहा कि हाईकोर्ट से 21 मार्च 2023 को केस वापसी की अनुमति ली गई है। जिसके बाद लोक अभियोजक ने स्वतंत्र निर्णय लिया और नियमानुसार अर्जी दाखिल की। मजिस्ट्रेट ने इस तथ्य और कानून की अनदेखी की है इसलिए मजिस्ट्रेट का आदेश निरस्त किया जाए। यह भी कहा कि सरकार किसी भी स्तर पर केस वापसी का फैसला ले सकती है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित कर लिया था। बुधवार को पारित निर्णय में कोर्ट ने लोक अभियोजक के फैसले को विधि सम्मत माना और कहा कि मजिस्ट्रेट का आदेश तथ्य व कानून के विपरीत होने के कारण अवैध है।