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अपने राम के स्वागत को तैयार गोरखपुर का यह गांव, आज पहुंचेंगे मुख्यमंत्री योगी.. वनवासियों संग मनाएंगे दीप पर्व

कुसम्ही जंगल के 5 इलाकों जंगल तिनकोनिया नम्बर तीन, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी व चिलबिलवा में इनकी 5 बस्तियां वर्ष 1918 में बसीं। 1947 में देश भले आजाद हुआ, लेकिन वनटांगियों का जीवन गुलामी काल जैसा ही बना रहा।

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अपने राम के स्वागत को तैयार गोरखपुर का यह गांव, आज पहुंचेंगे मुख्यमंत्री योगी.. वनवासियों संग मनाएंगे दीप पर्व

अपने राम के स्वागत को तैयार गोरखपुर का यह गांव, आज पहुंचेंगे मुख्यमंत्री योगी.. वनवासियों संग मनाएंगे दीप पर्व

गोरखपुर। जिले का चर्चित गांव वनटांगियां आज दीप पर्व के दिन अपने राम के स्वागत को तैयार है।
2009 से इनके उद्धारक मुख्यमंत्री गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ इनके संग अपनी दीपावली मनाते हैं। मुख्यमंत्री के स्वागत को लेकर कुसम्ही जंगल के बीच बसे जंगल तिकोनिया नंबर तीन गांव में हर्ष व्याप्त है।योगी रविवार को यहां वनवासियों के साथ दीपावली मनाएंगे। साथ ही जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों को 153 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का दीपावली उपहार भी देंगे। बता दें कि करीब सौ साल तक उपेक्षा का दंश झेलने को अभिशप्त रहे वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नंबर तीन को अब जिले के अतिविशिष्ट गांव के रूप में जाना जाता है।

बतौर सांसद भी मुख्यमंत्री इनके साथ मनाते रहे हैं दीपावली

इसकी वजह है 2017 से ही मुख्यमंत्री योगी द्वारा इस गांव में दीपोत्सव मनाना। योगी वर्ष 2009 से ही बतौर सांसद यहां दीपावली मनाते रहे हैं। छह साल पहले मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने इसकी परंपरा शुरू की। बतौर मुख्यमंत्री वह रविवार को लगातार सातवीं बार वनटांगियों के साथ दीपावली की खुशियां साझा करेंगे।

मुख्यमंत्री बनने के बाद बदली इस गांव की तस्वीर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बतौर सांसद लोकसभा में वनटांगिया अधिकारों के लिए लड़कर 2010 में अपने स्थान पर बने रहने का अधिकार पत्र दिलाया। 2017 में मुख्यमंत्री बने तो वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा देकर उन्हें शासन प्रदत्त सभी सुविधाओं का हकदार बना दिया। उन्होंने वनटांगिया गांवों को आवास, सड़क, बिजली, पानी, स्कूल, जैसे संसाधनों के साथ ही यहां रहने वालों को जनहित की सभी योजनाओं से आच्छादित कर दिया है। 6 साल पहले मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने खुद द्वारा शुरू की गई परंपरा में रुकावट नहीं आने दी है।

जानिए कौन हैं 100 साल से उपेक्षित वनटांगिया

अंग्रेजी शासनकाल में जब रेल पटरियां बिछाई जा रही थीं तो बड़े पैमाने पर जंगलों से साखू के पेड़ों की कटाई हुई। इसकी भरपाई के लिए अंग्रेज सरकार ने साखू के पौधों के रोपण और उनकी देखरेख के लिए गरीब भूमिहीनों, मजदूरों को जंगल मे बसाया। साखू के जंगल बसाने के लिए वर्मा देश की टांगिया विधि का इस्तेमाल किया गया, इसलिए वन में रहकर यह कार्य करने वाले वनटांगिया कहलाए।

कुसम्ही जंगल के 5 इलाकों जंगल तिनकोनिया नम्बर तीन, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी व चिलबिलवा में इनकी 5 बस्तियां वर्ष 1918 में बसीं। 1947 में देश भले आजाद हुआ, लेकिन वनटांगियों का जीवन गुलामी काल जैसा ही बना रहा।

जंगल बसाने वाले इस समुदाय के पास न तो खेती के लिए जमीन थी और न ही झोपड़ी के अलावा कोई निर्माण करने की इजाजत।पेड़ के पत्तों को तोड़कर बेचने और मजदूरी के अलावा जीवन यापन का कोई अन्य साधन भी नहीं। और तो और इनके पास ऐसा कोई प्रमाण भी नहीं था जिसके आधार पर वह देशमें अपने नागरिक होने का दावा कर पाते। समय समय पर वन विभाग की तरफ से वनों से बेदखली की कार्रवाई का भय। पर इनके उद्धारक मुख्यमंत्री योगी ने इन्हे इन सब से मुक्त किया। अब इनकी यह परेशानियां इतिहास बन चुकी हैं।

153 करोड़ का दीपावली गिफ्ट देंगे सीएम

रविवार को जंगल तिकोनिया नंबर तीन में वनटांगिया दीपोत्सव मनाने के साथ ही मुख्यमंत्री जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों को 153 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का दीपावली गिफ्ट भी देंगे। मुख्यमंत्री के हाथों 91 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण तथा 62 करोड़ रुपये की लागत वाली विकास परियोजनाओं का शिलान्यास होगा।

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